UGC New Rules: क्या हैं यूजीसी के नए नियम जिन पर हो रहा बवाल, पूरा कंफ्यूजन यहां करें दूर
यूजीसी के नए नियमों पर देश भर में धीरे धीरे प्रदर्शन बढ़ रहा है। स्टूडेंट्स, टीचर्स से लेकर सामान्य लोग ...और पढ़ें

What are the new UGC rules
HighLights
यूजीसी के नए नियमों की डिटेल यहां करें चेक।
जानें क्यों हो रहा इन नियमों का विरोध।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए जो नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के चलते देशभर में शिक्षकों, स्टूडेंट्स के साथ ही आम आदमी के बीच रोष बढ़ता दिख रहा है। इन नियमों के विरोध में यूपी सरकार में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सरकार की ओर से उन्हें निलंबित कर दिया गया है। उनके अलावा प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने भी पोस्ट करते हुए लिखा- चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।
क्या है नया रूल
यूजीसी की ओर से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026′ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) लाया गया है। इसके 4 बिंदु निम्नलिखित हैं-
हर यूनिवर्सिटी/ कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads का होगा गठन
देशभर के हर यूनिवर्सिटी/ कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads का गठन किया जायेगा। इसके विरोध में तर्क दिया गया है कि इसमें Equity Squads को अधिक अधिकार प्रदान किये गए हैं और इसमें भेदभाव की परिभाषा भी स्पष्ट नहीं हैं।
24x7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली
इस नियम के तहत हर संस्थान में Equal Opportunity Centre स्थापित किया जायेगा जहां स्टूडेंट्स अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके विरोध में तर्क दिया गया है कि इस नियम भी सवर्ण छात्रों के लिए ठीक नहीं है। इसमें बिना किसी भी सबूत के कोई भी शिकायत दर्ज कर देगा जिस दूसरे स्टूडेंट्स का करियर प्रभावित होगा।
एससी- एसटी पर दिया गया ध्यान
इस नए नियम का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ी जातियों को संस्थान में सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाना है जिससे कि वे भेदभाव का शिकार न हों। इसको लेकर आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे सवर्ण वर्ग के छात्रों को सीधे टारगेट किया जायेगा जो और भी ज्यादा भेदभाव बढ़ाने का काम करेगा।
नियमों का पालन करना अनिवार्य
यूजीसी की ओर से कहा गया है कि सभी संस्थान इस नियम का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे। अगर कोई संस्थान इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी मान्यता रद की जा सकती है या उनका फंड रोका जा सकता है। इसके तर्क में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे संस्थानो पर और अधिक दबाव बढ़ेगा।

UGC ने कंफ्यूजन दूर करने के लिए दिया बयान
इन नियमों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर यूजीसी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि इन नियमों को लाना वर्तमान समय में जरूरी है। पिछले कुछ सालों में पिछड़ी जातियों के खिलाफ संस्थानों में कई केस सामने आये हैं जिनको ध्यान में रखकर यह रूल लाया गया है। यूजीसी के मुताबिक इस नए नियम से समान अवसर और सभी वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इससे पिछड़े वर्ग के छात्रों को भेदभाव से बाहर किया जा सकेगा।
