नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। जो बाइडन अमेरिका के 46वें राष्‍ट्रपति बन गए हैं। एक समारोह में उन्‍हें और कमला हैरिस को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस ने पद और गोप‍नीयता की शपथ दिलाई। बाइडन का ये शपथ समारोह काफी समय तक याद रहेगा। इसके याद रहने की कई वजह हैं। जैसे इस शपथ ग्रहण समारोह में निवर्तमान राष्‍ट्रपति के तौर पर डोनाल्‍ड ट्रंप ने हिस्‍सा नहीं लिया। इसकी वजह से वर्षों पुरानी परपंरा टूट गई। इस बार समारोह में लोगों की उपस्थिति भी पहले के मुकाबले कम रही। शपथ लेने के साथ ही बाइडन अमेरिकी इतिहास के सबसे उम्रदराज राष्‍ट्रपति भी बन गए हैं। इससे पहले डोनाल्‍ड ट्रंप पर ये खिताब था। बहरहाल, अब जबकि बाइडन ने सत्‍ता संभाल ली है तो उनके सामने कई तरह की चुनौतियां भी हैं। वहीं ट्रंप का चैप्‍टर अब पूरी तरह से क्‍लोज हो चुका है।

अमेरिका में भारत की राजदूत रह चुकीं मीरा शंकर का मानना है कि अब डोनाल्‍ड ट्रंप का चैप्‍टर पूरी तरह से खत्‍म हो चुका है। जिस तरह से उन्‍होंने सत्‍ता हस्‍तांतरण को लेकर उठापठक की उसको देखते हुए भविष्‍य में उनके वापस आने की संभावना अब लगभग खत्‍म हो चुकी है। वहीं राष्‍ट्रपति बाइडन के लिए अब चुनौतियों की शुरुआत होने वाली है। इसमें पहली चुनौती देश को कोरोना महामारी से निकालना है। इस महामारी की वजह से अमेरिका को आर्थिकतौर पर काफी नुकसान हुआ है। लाखों लोगों की मौत हुई है। ऐसे में बाइडन को इससे बाहर आने के लिए रोडमैप तैयार कर काम करने की जरूरत होगी। भारत से भविष्‍य में बाइडन के संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में उनका कहना था कि दोनों देश एक साथ मिलकर काम करेंगे, जैसे पहले से कर रहे थे।

जेएनयू के प्रोफेसर बीआर दीपक का भी मानना है कि बाइडन प्रशासन में भारत और अमेरिकी संबंधों में किसी तरह का बदलाव या कमी देखने को नहीं मिलेगी। उनके मुताबिक अमेरिका में कभी भी नया राष्‍ट्रपति पुरानी बनाई विदेश नीतियों को को नहीं तोड़ता है। इस लिहाज से अमेरिका का रुख बाइडन प्रशासन में भारत की तरफ से सकारात्‍मक ही रहेगा। उनके मुताबिक वो सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करेंगे। आपको बता दें कि डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई वैश्विक संस्‍थाओं से, जिनके मूल में और आधार में अमेरिका ही है, से नाता तोड़ लिया था। ऐसे में अब बाइडन उनसे दोबारा जुड़ने का एलान कर दिया है। उन्‍होंने कहा है कि वो पेरिस समझौता और या फिर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन हो सभी से वापस जुड़ेंगे और विश्‍व बिरादरी के साथ मिलकर काम करेंगे।

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