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घुसपैठ पर सख्त त्रिपुरा हाई कोर्ट, सरकार से 3 महीने में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Published: Fri, 03 Apr 2026 06:05 PM (IST)

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सीमा पार घुसपैठ रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर तीन महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

घुसपैठ पर सख्त त्रिपुरा हाई कोर्ट सरकार से 3 महीने में मांगी विस्तृत रिपोर्ट (फाइल फोटो)

घुसपैठ पर सख्त त्रिपुरा हाई कोर्ट सरकार से 3 महीने में मांगी विस्तृत रिपोर्ट (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। त्रिपुरा हाई कोर्ट ने भाजपा शासित राज्य सरकार से कहा है कि वह सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत रिपोर्ट अगले तीन महीनों के भीतर प्रस्तुत करे।

एक वकील ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता में एक डिवीजन बेंच ने यह निर्देश गुरुवार को तीन व्यक्तियों द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया जिसमें टिपरा मोथा पार्टी के विधायक रंजीत देबबर्मा भी शामिल थे।

याचिकाकर्ताओं ने क्या आरोप लगाए

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा घुसपैठ रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के बावजूद त्रिपुरा सरकार इस समस्या को हल करने के लिए प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एंथनी देबबर्मा ने कहा,''डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से कहा है कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार घुसपैठियों का पता लगाने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए उठाए गए कदमों पर अगले तीन महीनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।''

पूर्वोत्तर राज्य की बांग्लादेश के साथ 856 किमी की अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत सीमा बाड़बंदी की गई है। न्यायालय के निर्देश का जवाब देते हुए रंजीत देबबर्मा ने कहा कि घुसपैठ को तुरंत रोकना चाहिए ताकि राज्य की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

विधायक ने क्या कहा?

विधायक ने कहा कि जबकि अन्य राज्य केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन के लिए घुसपैठ विरोधी अभियान चला रहे हैं। त्रिपुरा सरकार इस मामले में सही तरीके से काम नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा, ''मैंने कई मंचों पर इस मुद्दे को उठाया, लेकिन मुझे उचित प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे मुझे न्यायालय के दरवाजे पर दस्तक देने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब, न्यायालय इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेगा।''

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