TMC में असली Vs नकली: 19 बागी सांसदों का शक्ति प्रदर्शन, सोमवार को स्पीकर के सामने पेश करेंगे दावा
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद 19 बागी तृणमूल सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर खुद ...और पढ़ें
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HighLights
19 बागी TMC सांसद स्पीकर से मिलेंगे।
खुद को 'असली तृणमूल' के रूप में मान्यता मांगेंगे।
राजग का समर्थन करेंगे, संख्या बढ़ने का दावा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में सत्ता पलट के बाद से ही तृणमूल संसदीय दल में टूट को लेकर चल रही कवायद सोमवार को संभवत: पूरी हो जाएगी। सोमवार को 19 बागी सांसदों का गुट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलेगा और औपचारिक रूप से मांग करेगा सदन में उन्हें असली तृणमूल कांग्रेस की मान्यता दी जाए। उनके बैठने की व्यवस्था भी बदली जाए क्योंकि अब वह गुट राजग का समर्थन करेगा।
बागी गुट का दावा है कि सोमवार तक उनकी संख्या और बढ़ सकती है। दरअसल उससे पहले रविवार की रात दिल्ली में उनकी बैठक फिर से भाजपा नेताओं के साथ होगी जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद हो सकते हैं। ममता बनर्जी से बगावत करने वाले 19 सांसदों के नाम सामने आ चुके हैं, जिन्होंने एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने का सोमवार को समय मांगा है।
19 बागी सांसदों ने किया हस्ताक्षर
इसमें कथित रूप से काकोली घोष दस्तीदार सहित युसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी राय सहित 19 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने हालांकि संविधान के 91वें संशोधन का जिक्र करते हुए इन बागी सांसदों को चुनौती दी है कि अब कोई अलग गुट नहीं बन सकता है। उन्हें अलग होने पर किसी दल में शामिल होना होगा। लेकिन माना जा रहा है कि यह समूह अलग गुट की नही बल्कि मूल तृणमूल के रूप में मान्यता देने की मांग करेगा।
उनकी यह दलील होगी कि इस टूट को सामान्य टूट के रूप में न देखा जाए। इसे राज्य विधानसभा में पार्टी में टूट के साथ देखा जाए। यानी पुरानी तृणमूल पार्टी में विधानसभा से लेकर संसद तक टूट हुई है। विधानसभा में स्पीकर ने उस गुट को ही विपक्षी दल की मान्यता दी है। लोकसभा में भी दो तिहाई बहुमत वाले इस दल को ही मूल पार्टी के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।
अब तृणमूल का क्या होगा?
बागी गुट में शामिल जगदीश चंद्र बिसुनिया ने कहा कि हस्ताक्षर लेने की प्रक्रिया 8 जून को शुरू हुई थी और अब तक 19 सदस्य उसमें हस्ताक्षर कर चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि ममता की पार्टी में पहले ही मची उथलपुथल को एक दिन पहले आए कल्याण बनर्जी के बयान ने और ज्यादा भड़का दिया है। कुछ और सदस्य में मंथन चल रहा है।
वैसे भी अगर मूल पार्टी के रूप में तृणमूल को मान्यता मिल जाती है तो उनकी राजनीति यहीं रहकर सरल होगी। बताया जाता है कि रविवार को दिल्ली में इन सांसदों की फिर से एक बैठक होगा जिसमें भाजपा के एक बड़े नेता भी हो सकते हैं। इस बैठक में उन सभी सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होगी जिनके हस्ताक्षर हैं।
