नई दिल्ली, जेएनएन। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले पर अगले साल जनवरी तक के लिए सुनवाई टल गई है। अब जनवरी 2019 में मामले की सुनवाई की तारीख तय करने पर सुनवाई होगी। उसी दौरान कोर्ट तय करेगा कि कौन सी पीठ अयोध्या मामले की सुनवाई करेगी। भगवान रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड सहित कुल 13 पक्षों की अपीलें सुप्रीम कोर्ट मे लंबित है। सभी पक्षों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। आपको सिलसिलेवार बताते हैं कि अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ।

  • अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण साल 1528 में किया गया।
  • साल 1949 में बाबरी मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति देखी गई थी, जिसके बाद दोनों पक्षों के प्रतिनिधि कोर्ट चले गए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विवादित स्थल पर ताला लगाने का आदेश दिया।
  • 1959 में निर्मोही अखाड़ा की ओर से विवादित स्थल के स्थानांतरण के लिए अर्जी दी गई।
  • 1961 में यूपी सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ने भी बाबरी मस्जिद स्थल के मालिकाना हक के लिए अपील दायर की।
  • 1986 में विवादित स्थल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। 1986 में ही बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया गया।
  • 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने राजीव गांधी सरकार की इजाजत के बाद बाबरी के पास राम मंदिर का शिलांयास किया।
  • 1990 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने देशव्यापी रथयात्रा की शुरुआत की।
  • 1991 में इसी रथयात्रा की लहर से भाजपा ने यूपी में विधानसभा चुनाव जीता। मंदिर निर्माण के लिए देशभर से इंटें भेजी गई।
  • 6 दिसंबर, 1992 का वो दिन, जब अयोध्या पहुंचकर हजारों की संख्या में कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया। बाबरी विध्वंस के बाद देशभर में दंगे हुए।
  • प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया।
  • 16 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए एमएस लिब्रहान आयोग का गठन किया गया।
  • 1994 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित केस की सुनवाई शुरू हुई।
  • 4 मई, 2001 को स्पेशल जज एसके शुक्ला द्वारा भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 13 नेता आरोप मुक्त किए गए।
  • 1 अप्रैल 2002 को अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
  • मंदिर या मस्जिद के प्रमाण के लिए 5 मार्च 2003 को इलाहबाद हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अयोध्या में खुदाई का निर्देश दिया।
  • 22 अगस्त, 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई के बाद इलाहबाद हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि मस्जिद के नीचे 10वीं सदी के मंदिर के अवशेष प्रमाण मिले हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चुनौती दी।
  • सितंबर 2003 में अदालत ने फैसला देते हुए कहा कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।
  • जुलाई 2009 में लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • 26 जुलाई, 2010 को इस मामले की सुनवाई कर रही इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा और सभी पक्षों को आपस में इसका हल निकाले की सलाह दी।
  • 28 सितंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया।
  • 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन का तीन हिस्सों में बंटवारा कर दिया। इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को मिला।
  • 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
  • 21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने को कहा।
  • 19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित भाजपा और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।
  • 16 नवंबर 2017 को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की और कई पक्षों से मुलाकात की।
  • 5 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 8 फरवरी तक सभी दस्तावेजों को पूरा करने के लिए कहा।
  • 8 फरवरी 2018 को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर नियमित सुनवाई करने की अपील की। हालांकि, उनकी याचिका खारिज हो गई। 
  • 14 मार्च 2018 को वकील राजीव धवन ने कोर्ट से साल 1994 के इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के फैसले को पुर्नविचार के लिए बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग की।
  • 20 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 27 सितंबर 2018 को कोर्ट ने इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के 1994 का फैसले को बड़ी बेंच के पास भेजने से इनकार कर दिया और कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला सिर्फ भूमि आधिग्रहण के केस में ही लागू होगा।

Posted By: Manish Negi

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