कोच्चि/केरल (जेएनएन)। मानव सभ्यता के विकास के दौरान इंसान ने अपनी एक खूबी से सबको प्रभावित किया है। वो है इंसानों जैसी प्रतिकृति बनाने की कला और इसे ही नाम मिला, डॉल मेकिंग यानी गुड़िया बनाने का हुनर।

वैसे तो गुड़िया बच्चों के मन को बहलाने के लिए बनाई जाती है। मगर कई बार वो बड़ों के दिलों को भी छू जाती है। ये केवल एक खिलौना न होकर किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और कला की तस्वीर भी पेश करती है।

वैसे तो अलग-अलग सामान की मदद से गुड़िया बनाई जाती है। ऐसे में आपने भी शायद ही ऐसा कभी सुना हो कि कोई रद्दी कागज से गुड़िया बनाए। मगर कोच्चि की विजिथा रिथीश ऐसी महिला हैं, जो रद्दी कागज के टुकड़ों से रंग-बिरंगी गुड़िया बनाती हैं। अपनी इसी काबिलियत और हुनर के दम पर उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका है।

रद्दी कागज से बनाती हैं गुड़िया

वैसे तो लोग घर के रद्दी कागज को कचरे के डब्बे में फेंक देते हैं। मगर विजीथा अपने घऱ आने वाले शादी के कार्ड, पुराने अखबार, बुकलेट को कचरे के ढेर में नहीं जाने देती हैं। वो इसी रद्दी कागज से रंग-बिरंगी गुड़िया बनाती हैं। विजीथा का कहना है कि, "जो सामान लोगों के लिए रद्दी हो जाता है, उसे मैं गुड़िया बनाने के लिए रेडीमेड सामान के तौर पर इस्तेमाल करती हूं। मैंने कभी भी किसी क्राफ्ट दुकान से पेपर नहीं खरीदे। मेरे लिए घर में आए शादी के कार्ड, रंगीन कागज पर छपे एड ही गुड़िया बनाने के लिए काफी हैं।"

बचपन से था कला के प्रति लगाव

विजीथा भले आज रद्दी कागज से रंग-बिरंगी गुड़िया बना रही हैं। मगर इसका शौक उन्हें बचपन से ही था। स्कूल दिनों में भी वो अपनी इस काबिलियत को कई बार साबित कर चुकी हैं। अपने इसी हुनर के दम पर उन्होंने कई पुरस्कार जीते।

पति के साथ से बढ़ा आत्मविश्वास

विजीथा को बचपन से ये शौक था। मगर शादी के बाद पति के साथ से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने पूरी तरह इस क्राफ्ट पर ध्यान देना शुरू कर दिया। विजीथा ने बताया कि, पति और उनके परिवार के सदस्य भी कलाप्रेमी हैं। इसी वजह से उन्होंने मेरे हुनर को पहचाना और मैंने रंग-बिरंगी गुड़िया बनाने का काम शुरू किया।

2016 में लिम्का बुक में दर्ज हुआ नाम

विजीथा के हुनर को साल 2016 में तब पहचान मिली, जब उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। विजीथा ने अपने हाथ से पचास फीट का हार बनाया था, जिसमें एक लॉकेट भी था। इस हार को बनाने में उन्हें एक महीने का वक्त लगा था। इस बनाने में उन्होंने रद्दी कार्ड-बोर्ड का इस्तेमाल किया था।

इस पहचान के बाद विजीथा ने ज्वैलरी मेकिंग की क्लासेस शुरू कर दी, जो बहुत हिट हुई। इसके बाद विजीथा ने इस तकनीक की मदद से गुड़िया बनाने का काम शुरू किया। वो दिन है और आज का, विजीथा अपने इस हुनर की छाप छोड़ रही हैं।

हर गुड़िया की डिजाइन है अलग

विजीथा पेपर क्राफ्ट तकनीक की मदद से गुड़िया बना रही है। इसे आकार देने के लिए, जिस सामान की उन्हें जरुरत होती है, वो भी निशीथा बाजार से खरीदने के बजाए घऱ में ही बनाती हैं। इसी वजह से उनके द्वारा बनाई गई कोई दो गुड़िया एक सी नहीं होती है।

ऐसे दर्ज हुआ गिनीज बुक में नाम

विजीथा ने पांच महीने के भीतर रद्दी कागज से 1350 गुड़िया बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉ़डर्स में अपना नाम दर्ज कराया है। ये हाथ से बनी गुड़िया का सबसे बड़ा कलेक्शन है और हैरत की बात ये है कि कोई भी दो गुड़िया एक जैसी नहीं है।

अब वो लिख रहीं किताब

अब विजीथा दूसरों को ये हुनर सिखाने के लिए Do-It-Yoursel(DIY) नाम की किताब लिख रही हैं। जिसमें रद्दी कागज से रंग-बिरंगी गुड़िया बनाने का तरीका लिखा होगा। वहीं वेस्ट मेटेरियल की मदद से कैसे काम की चीजें बनाई जा सकती हैं। इसकी जानकारी भी इस बुक में होगी। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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