राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित लददाख में 31 अक्तूबर को सिर्फ राजनीतिक व्यवस्था ही नहीं बदलेगी, रोजगार से लेकर औद्योगिक निवेश का परिदृश्य भी बदल जाएगा।सूचना प्रौद्योगिकी, ढांचागत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण, होटल, प्रतिरक्षा, कौशल विकास और पर्यटन समेत विभिन्न क्षेत्रों में देश के 31 नामी व्यावसायिक घरानों और कंपनियों ने लगभग 15 हजार करोड़ का पूंजी निवेश करने की इच्छा जताते हुए लगभग 45 एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट भी जमा कराए हैं। इनमें से कई ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का हवाला देते हुए डेढ़ दशक के लिए टैक्स हॉलिडे का आग्रह भी किया है।

यहां कहना असंगत नहीं होगा कि राज्य में 2013 के दौरान भी देश विदेश की विभिन्न कंपनियों से करीब 450 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे जो वर्ष 2017 में बढ़कर 1008 करोड़ तक पहुंचे थे। लेकिन 5 अगस्त के बाद जम्मू कश्मीर व लद्दाख में निवेश को लेकर विभिन्न कंपनियों ने बेझिझक दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। करीब 70 कंपनियों ने निवेश के लिए राज्य प्रशासन के साथ विभिन्न स्तरों पर संपर्क किया है।

ये हैं निवेश के लिए आगे आने वाली प्रमुख कंपनियां

राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अनुसार, केंद्र शाासित जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित लद्दाख में निवेश की इच्छा के साथ ईओआइ (एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट) जमा कराने वाली कंपनियों में श्री सीमेंट्स, डालमिया सीमेंट्स, कृष्णा हायड्रो प्रॉजेक्ट, एसकाट इंफ्रास्ट्रकचर, एलएम एनर्जी एंड साफ्टवेयर, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, रिलायंस कम्यूनिकेशन्स, प्रिसिशन इंडस्ट्रीयल सिस्टम, इंडस वैली अयूर विलास, ओंकारेश्वर ट्रेड लिंक्स, सीवीके ग्रुप, पेपर बोट डिजायन स्टुडियो, केआर पेपर लिमिटेड, पोवाल लैब्स, विशाल एजूटेक प्राईवेट लिमिटेड, सेवक लिमिटेड, प्रकाश एम्यूजमेंट राईड्स एंड फन वल्र्ड प्राईवेट लिमिटेड और मचानी ग्रळ्प हैं। यह कंपनियां शुरू में 15 हजार करोड़ का निवेश कर रही हैं। इस निवेश को मार्च माह के दौरान 35 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कुछ और औद्योगिक घरानों व निवेशकों के साथ भी संपर्क-संवाद किया जा रहा है।

12 नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर काम शुरू

ईओआई जमा कराने वाली कंपनियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 12 नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा इन कंपनियों को उनके निवेश लायक इकाईयां स्थापित करने के लिए योग्य जमीन को चिह्नित करने में भी कंसल्टेंसी की मदद ली जा रही है। वादी में 250 कनाल से ज्यादा जमीन चाहिए। संबधित कंपनियों को अपने उपक्रम में 80 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय लोगों को ही देनी होगी। निवेश की इच्छुक कंपनियों ने कारोबार और विभिन्न इलाकों को विकसित करने की पूरी योजना सामाजिक और पर्यावरण के अनुकूल तैयार की है।

कंबल निर्माता फिरोज बोले, अब रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

कंबल निर्माता फिरोज अहमद फाफू ने कहा कि कश्मीर में हर प्रकार के उद्योग के लिए काफी संभावनाएं हैं। यहां लोग निवेश से डरते थे, क्योंकि अनुच्छेद 370 की दीवार थी। इससे भी ज्यादा सरकारी तंत्र में कथित भ्रष्टाचार और उस पर आतंकवाद का डर था। अब वह खत्म हो गया है। प्रशासनिक तंत्र भी बदल गया है। केंद्र सरकार अब सीधे राज्य के प्रशासन को देख रही है। आतंकवाद में भी कमी आई है। इसलिए अब यहां बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश होगा। दिल्ली,पंजाब और हरियाणा में कई व्यापारियों व निवेशकों ने मळ्झसे संपर्क कर, मेरे साथ भागीदारी में यहां होटल इंडस्ट्री में काम करने की इच्छा जताई है। यहां अब रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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