'श्रीलेखा ने नहीं दिया इस्तीफा, पार्षद के रूप में करती रहेंगी काम', तिरुवनंतपुरम के मेयर का दावा
तिरुवनंतपुरम के मेयर वी. वी. राजेश ने स्पष्ट किया है कि भाजपा पार्षद आर. श्रीलेखा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है और वे पार्षद बनी रहेंगी।

तिरुवनंतपुरम के मेयर वी. वी. राजेश और भाजपा पार्षद आर. श्रीलेखा(फोटो: सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम। तिरुवनंतपुरम के मेयर वी. वी. राजेश ने रविवार को स्पष्ट किया कि पूर्व डीजीपी और भाजपा पार्षद आर. श्रीलेखा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है और वे अपने पद पर बनी रहेंगी।
यह विवाद तब सामने आया जब श्रीलेखा द्वारा अपने वार्ड के निवासियों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में कथित तौर पर एक संदेश भेजा गया, जिसमें लिखा था कि उन्होंने मेयर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और 5 अक्टूबर को इसकी एक प्रति जिला कलेक्टर को भी सौंपेंगी।
इस्तीफे के पत्र पर मेयर के बदलते बयान
इससे पहले मेयर राजेश ने पत्रकारों से कहा था कि उन्हें 30 सितंबर को इस्तीफा पत्र मिला था, जिसमें निजी असुविधाओं का हवाला दिया गया था। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने इस पत्र को नगर निगम सचिव के पास नहीं भेजा है, जो इस्तीफा स्वीकार करने के लिए सक्षम अधिकारी हैं।
हालांकि, रविवार को मेयर अपने पिछले बयान से पलटते दिखे और दावा किया कि किसी भी तरह का इस्तीफा पत्र मौजूद ही नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि किसने कहा कि उन्होंने इस्तीफा दिया है, वे अपने पद पर बनी रहेंगी और अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगी।
निगम में किसी संकट से इनकार
व्हाट्सएप संदेश के बारे में पूछे जाने पर मेयर ने सीधा जवाब देने से परहेज किया और निगम में किसी भी तरह के राजनीतिक संकट से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्षद अक्सर अपने वार्डों के लिए फंड और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े पत्र सौंपते रहते हैं।
मेयर के अनुसार, श्रीलेखा ने भी वार्ड के सुचारू संचालन को लेकर ऐसा ही एक पत्र दिया था, जिसके कुछ मुद्दों पर पार्टी के हस्तक्षेप की आवश्यकता है और कुछ पर मेयर स्तर पर कार्रवाई होनी है।
माकपा नेता वी. शिवनकुट्टी का तीखा हमला
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई-एम नेता और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने श्रीलेखा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पद और सत्ता हासिल करने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकती हैं और यह कदम केवल भाजपा पर दबाव बनाकर नया पद पाने की धमकी मात्र है।
श्रीलेखा के कांग्रेस में जाने की अटकलों पर शिवनकुट्टी ने कहा कि कुछ नेता स्वाभाविक रूप से वहीं जाते हैं जहां उन्हें सबसे ज्यादा फायदा दिखता है। हालांकि, श्रीलेखा ने अभी तक इस पूरे विवाद और विपक्ष के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
तिरुवनंतपुरम निगम में भाजपा का सियासी समीकरण
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में 101 सीटें हैं, जहां पिछले साल भाजपा ने पहली बार एक निर्दलीय पार्षद के सहयोग से 51 सदस्यों का समर्थन जुटाकर बेहद मामूली बहुमत से सत्ता हासिल की थी। वर्तमान में भाजपा की राज्य उपाध्यक्ष श्रीलेखा पिछले निकाय चुनाव में सास्तमंगलम वार्ड से जीती थीं।
बहुमत का आंकड़ा बेहद नाजुक होने के कारण श्रीलेखा का पार्षद बने रहना भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पहले उन्होंने अप्रैल में वत्तियूरकावु सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
