नई दिल्‍ली। Coronavirus Outbreak: कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच हम कई तरह की परेशानियों से घिरे हैं। कोविड-19 संक्रमितों को दवा और आवश्यक चीजें मुहैया कराने से लेकर शारीरिक दूरी का पालन कराने तक की चुनौतियां शामिल हैं। कई बार इन चुनौतियों से जूझते हुए दूसरों के संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में तकनीक का योगदान हमें इन परेशानियों से बचा रहा है। गार्जियन के अनुसार दुनिया के कई देशों में कोरोना संकट के दौरान रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो हमें इस संकट से पार पाने में मदद कर रहे हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही पांच रोबोट्स के बारे में।

बोस्टन डायनेमिक्स : सिंगापुर के पार्क में शारीरिक दूरी का पालन कराने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। बोस्टर डायनेमिक्स का यलो डॉग रोबोट कई कैमरों और सेंसर से युक्त है, जो कि नियमों का पालन नहीं करने वालों को पकड़ता है और पहले से रिकॉर्डेड चेतावनी को प्ले करता है। अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया है कि यह डिवाइस किसी तरह का डाटा संग्रह नहीं करता है।

स्टारशिप टेक्नोलॉजी : ब्रिटेन के मिल्टन केंस में छह रोबोट खाद्य पदार्थों और सुपर मार्केट से छोटे सामान को स्थानीय लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इन रोबोट्स में पहिए लगे हैं, जिनके जरिये ये शहर के साइकिल वाले रास्ते पर बढ़ते हुए लोगों के घरों तक पहुंचते हैं। इनकी अधिकतम गति करीब साढ़े छह किमी प्रति घंटे की है। कंपनी ने कोरोना संकट के इस दौर में मदद के लिए अपने डिलीवरी चार्ज को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों के लिए छोड़ दिया है।

यूवीडी रोबोट्स : चीन के अस्पतालों में डेनमार्क के इन रोबोट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये रोबोट्स शक्तिशाली अल्ट्रावायलेट किरणों के जरिये किसी भी सूक्ष्मजीव के शक्तिशाली डीएनए या आरएनए को नष्ट कर सकते हैं। हालांकि यह नजदीक आने वाले किसी भी मनुष्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। यद्यपि यह रोबोट अस्पताल के नियमों में ढले होते हैं और तभी अपना काम करते हैं, जब मेडिकल स्टॉफ उनके पास नहीं होता है।

जोरा बोट्स : कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए संयुक्त राष्ट्र ने रवांडा को बेल्जियम की कंपनी जोरा बोट्स के पांच रोबोट उपलब्ध कराए हैं। कोरोना संकट के दौरान यह रोबोट काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं। ये रोबोट तापमान लेने के साथ ही मास्क नहीं पहनने वालों की पहचान करते हैं। इसके साथ ही ये मरीज को देख और सुनकर उसमें असामान्यता की पहचान भी कर सकते हैं। साथ ही यह कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को दवाओं का वितरण करने और ऐसे ही अन्य कार्यों को करने में भी सक्षम होते हैं।

ओमनी लैब्स : जापान में ओमनी लैब्स के न्यूमी रोबोट्स भी कई तरह से उपयोगी साबित हो रहे हैं। यह कोरोना वायरस के कारण क्वारंटाइन में पहुंचे छात्रों की जगह स्नातक समारोहों का हिस्सा बन रहे हैं। इन रोबोट्स के सिर पर कंप्यूटर टैबलेट्स लगे होते हैं, जूम एप के जरिये स्टूडेंट्स इससे जुड़ते हैं और विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री प्राप्त करते हैं। इस दौरान बाकायदा ये रोबोट डिग्री प्राप्त करने वाले स्टूडेंट्स की तरह परंपरागत पोशाक में होते हैं। चीन में भी ऐसा ही समारोह आयोजित किया गया था।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न डेनमार्क ने दुनिया का पहला पूरी तरह ऑटोमैटिक रोबोट तैयार कर लिया है। ये अकेले ही कोविड-19 का टेस्ट करने में सक्षम है। इसकी वजह से स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी सीधेतौर पर इसकी चपेट में आने से बच सकते हैं। इस रोबोट को बनाने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी व्‍यक्ति में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए खून की जांच से लेकर स्वॉब टेस्ट तक किया जाता है। स्‍वाब टेस्‍ट के लिए नाक या गले के अंदर एक लंबा सा ईयरबड जैसा दिखने वाला स्वॉब डाल कर सैंपल लिया जाता है, लेकिन इसमें सैंपल लेने वाले के संक्रमित होने का खतरा रहता है। वहीं दूसरी तरफ ये टेस्‍ट इसकी जांच के लिए कफी कारगर माना गया है। इससे आने वाले परिणाम काफी सटीक होते हैं।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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