नई दिल्ली, विनीत शरण। कोरोना लॉकडाउन के चलते मार्च के मध्य से ही देश-दुनिया के अधिकांश थियेटर बंद हैं। हालांकि, समाज के हर तबके और संस्था की तरह थियेटर भी इस महामारी से जंग में पीछे नहीं है। कहीं, जिंदगी की ठोस सच्चाइयों और संदेशों को केंद्र में रखकर नाटकों का ऑनलाइन मंचन हो रहा है। तो कहीं फिजिकल डिस्टैंसिंग का ध्यान रखते हुए स्ट्रीट प्ले के जरिए लोगों में संघर्ष करने का माद्दा और जज्बा भरने की कोशिश की जा रही है।

अस्मिता थिटेयर ग्रुप के अरविंद गौर बताते हैं कि उनका थियेटर 20 मार्च से ही क्वारंटाइन थियेटर फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है। 70 दिनों से यह फेस्टिवल जारी है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर कई नाटकों- जैसे कोर्ट मार्शल, मामूली आदमी आदि के वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं। ताकि दर्शकों का मनोरंजन होता रहे। वहीं, 40 कॉलेजों के साथ मिलकर कॉलेज फेस्टिवल भी किए जा रहे हैं। नए छात्रों के लिए थियेटर की ऑनलाइन माध्यमों के जरिए क्लास भी चलाई जा रही है। सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए मुंबई के एक कम्युनिटी किचेन में स्वयंसेवा भी चल रही है। अरविंद गौर ने कहा कि वे हर वैसी कोशिश कर रहे हैं, जो संभव है। लॉकडाउन के दौरान घट रही कहानियों पर छोटे-छोटे प्ले बनाकर अपलोड किया जा रहा है।

बेगूसराय फैक्ट रंग मंडल के नाटककार और लेखक सुधांशु फिरदौस कहते हैं कि लॉकडाउन के चलते उनके थियेटर ग्रुप के लोग आपस में मिल नहीं पा रहे हैं। पर कॉल और वीडियो कॉल के जरिए सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। सुधांशु फिरदौस के मुताबिक, इस वक्त मंचन संभव नहीं है। इसलिए कहानी लिखने और विचार-विमर्श पर ही सबका जोर है। कहानियां भी खूब हैं। कोई दोस्त से मिलने गया और लॉकडाउन में वहीं फंस गया और वह दोस्त के परिवार की हर बात से वाकिफ हो गया। तो कोई ट्रक ड्राइवर बीवी से मिलने चुपके से गांव गया और बीवी उससे ही लड़ने लगी, क्योंकि उसे संक्रमण का डर था। पड़ोसियों ने शोर सुना और ट्रक ड्राइवर क्वारंटाइन हो गया। श्रमिकों के दर्द की तो सैकड़ों कहानियां हैं। देश की हर सड़क पर उनके पैरों की छाप है। अब बस इन कहानियों को लिख रहे हैं। सुधांशु फिरदौस के मुताबिक, वे दर्द को भी कॉमेडी स्टाइल में लिख रहे हैं, क्योंकि दर्द पहले ही काफी महसूस हो चुका है। इस लॉकडाउन में और इसके बाद भी लोग हंसना चाहेंगे।

कलाकार ऑनलाइन काम करें

काम न मिलने के चलते यह अभिनेताओं के लिए बुरा वक्त है। हमने हाल के दिनों में कई टीवी कलाकारों को खुदकुशी करते देखा है। थियेटर कर्मी भी मुश्किल में हैं। सुधांशु फिरदौस भी मानते हैं कि ऊर्जा से भरे थियेटर कर्मी आज खुद को अकेला महूसस कर रहे हैं।

अरविंद गौर के मुताबिक, वह दूसरे कलाकारों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वे ऑनलाइन माध्यमों से छात्रों को थियेटर सीखा सकते हैं और इस मुश्किल वक्त में गुजर-बसर कर सकते हैं। दूसरों के भरोसे न रहें। कोई कब तक आपकी मदद कर सकता है। इसलिए कलाकार खुद कुछ करें। मोबाइल से वीडियो बनाएं और शेयर करें। नए छात्रों को क्लास दें।

 

 

 

 

 

 

 

 

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क्वारंटीन थियेटर फेस्टिवल का 70वां दिन: आज देखिए, सुप्रसिद्ध नाटककार महेश दत्तानी का नाटक 'तारा'। पाताल लोक के बाद आज ईश्वाक सिंह दर्शकों का चहेता एक्टर हैं। दर्शकों ने उसके अभिनय में ताजगी, इंटेंसिटी, गम्भीरता और सकारात्मक ऊर्जा देखी। ईश्वाक लगभग दस साल से अस्मिता थियेटर से साथ जुड़े हुए हैं। प्रतिबद्ध, प्रतिभाशाली और मेहनती ईश्वाक ने नुक्कड़ नाटकों से लेकर मंच तक कर्मठता से काम किया। महेश दत्तानी लिखित नाटक तारा में भी ईश्वाक ने अभिनय किया। इस नाटक में ईश्वाक सिंह के साथ काकोली गौड़, राहुल खन्ना, देवेन्द्र कौर, सावेरी श्री गौड़, अमित रावल और प्रभाकर पाण्डेय है। नाटक का अनुवाद नीरज मलिक ने किया है। संगीत परिकल्पना संगीता गौड ने की है। आज अस्मिता थियेटर के ऊर्जावान, प्रतिबद्ध और जुझारू युवा रंगकर्मी राहुल खन्ना और प्रभाकर पाण्डेय दोनों का जन्मदिन भी है। दोनो को जन्मदिन की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं। आज का नाटक इन सभी के लिए Asmita Theatre Group के सभी साथियों की तरफ से बर्थडे गिफ्ट भी है। राहुल 2009 -2010 से लगातार अस्मिता थियेटर में काम कर रहे हैं। प्रभाकर 2011 से साथ है। दोनो लगनशील, उत्साह, मेहनत और बिना रुके, बिना थके, लगातार काम करते हैं। आप दोनों ख़ुश रहो, खुशहाल रहो और आगे बढ़ते रहो। ऐसे ही डटे रहो, लगे रहो, नए मुकाम हासिल करते रहो । तुम्हारे दोनों के हौंसले, जज़्बे, शिद्दत और हिम्मत को सलाम। तहेदिल से बहुत सारा प्यार, कामयाबी की मंगलकामनाएं और ढ़ेर सारा प्यार। #PataalLok @PrinceKakoli, Davinder Kaur, Rahul Khanna, Prabhakar Pandey, @Ishwak Singh, Amit Rawal #MaheshDattani Mahesh Dattani, @getbajrang @arvindgaur_ @princekakoli @savereegaur_ @asmitatheatre_ @davinderkaur_dk @rajesh_kr1101 @rahulkhanna1313 @amitrawal2211 @garv24 @sejja24 @gurjeet_pathak @vipul.klr @mauryalok @shivangigoenka @shivam_bhasin @rohitrauthan_ @amittiwari06 @shuklamit @amitbansald2 @malaysantoshi @ikarankhanna @sunilprajapati_17 @amankhan89009 @sunil8469 @aditis246 @ayushi_rathod111 @hellopradeep @vishalrathorex @shimlabishnoi_official @susanbrar_ @sahilmukhi03 @mukta_p_p @gautam_bablu_ @sparkling_shweta_ @komalstrong @prabhakarpandey_ @tapasvi_joshi @nitink2501 @pihoothakur @manveerchoudhary @jha2334 @jitendrrsingh9 @ujjawalchaurasia @sheerazali_1 @aroramonark @clocktowerdiary @abhishekpandy @nikku_nivedita @toto.pillai @muslim.alam.5686322 @aishveryaa @ritusing @rahul.orchi

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क्या कर रहे हैं दुनिया के दूसरे थियेटर

जर्मनी के थियेटर द बर्लाइनर ऑनसांबल ने अपने थियेटर की सीटें दूर-दूर करके लॉकडाउन हटने के बाद की तैयारी शुरू कर दी है। थियेटर के निर्देशक ओलिवर रीज ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द कलाकारों को स्टेज पर आने की अनुमति देगी। वहीं, कैलिफोर्निया के नापा वैली में रात में घर के बाहर सड़क पर करीब सात लोग साथ बैठे। और बिल्कुल स्ट्रीट प्ले के अंदाज में अपनी कहानियां साझा कीं और वह भी एक दूसरे से कई मीटर की दूरी बनाते हुए। इन कोशिशों से उम्मीद बंधती है कि फिर थियेटर सजेंगे। पर दुनिया भर के रंगकर्मी और दर्शक सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएंगे।   

Posted By: Vineet Sharan

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