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मुस्लेमीन, रामपुर। हेलमेट पहनकर या सीट बेल्ट बांधकर वाहन चलाना आपकी अपनी जिंदगी के लिए बहुत जरूरी है, न कि पुलिस के लिए। यातायात पुलिस चालान इसीलिए काटती है ताकि आप अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत रहें। जुर्माना कई गुणा बढ़ाने के पीछे भी यही मंशा है। ताकि आपको अपनी लापरवाही की इससे कहीं बड़ी कीमत न चुकानी पड़ जाए। ऐसी ही एक लापरवाही ने रामपुर, उप्र निवासी रुखसाना की जिंदगी को नासूर बना दिया है।

बाइक चलाने की छूट
दरअसल, 27 नवंबर 2014 को उनका 14 साल का बेटा मारूफ सड़क हादसे का शिकार हो गया था। कक्षा नौ का छात्र था। अभिभावक ने उसे इतनी कमउम्र में भी बाइक चलाने की अनुमति दे रखी थी। यही नहीं, हेलमेट लगाने के लिए भी हिदायत नहीं दी थी। मारूफ बिना हेलमेट लगाए बाइक से कहीं जा रहा था। बाइक फिसल गई। मारूफ का सिर डिवाइडर से टकरा गया। गंभीर चोट आई। मुरादाबाद के अस्पताल में फायदा नहीं होने पर उसे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ले जाया गया। जहां वह 70 दिन तक आइसीयू में रहा। इसके बाद आज वह जिंदा तो है लेकिन होश में नहीं है, कोमा में है।

हेलमेट न लगाने पर बेटा पांच साल से कोमा में 
पांच साल से वह बिस्तर पर है, न कुछ बोल सकता है और न ही हिल सकता है। मां रुखसाना और पिता मकसूद पांच साल से उसकी सेवा में लगे हैं। अब तक उसके खर्च पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुका है। इसके बाद भी पांच से उनके बेटे के शरीर में कोई हलचल नहीं होने का दर्द जो रुखसाना और मकसूद के सीने में है, उसे वही समझ सकते हैं। पर एक उम्मीद है कि बेटे को होश आएगा। इसी के सहारे उसके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

पापा को है मलाल
मारूफ पिछले पांच साल से खामोश है। बेड पर ही वह जवान हो गया है। जब उसका एक्सीडेंट हुआ था, तब उसका चेहरा साफ था, लेकिन अब दाढ़ी-मूछ भी निकल आई हैं। उसके पापा मकसूद को इस बात का अफसोस है कि उन्होंने बेटे को बाइक चलाने की अनुमति क्यों दी। उसकी तो बाइक चलाने की उम्र भी नहीं थी। उन्हें इस बात का भी मलाल है कि बेटा हेलमेट लगाए होता तो सिर में चोट नहीं लगती। अब वह दूसरों को नसीहत देते हैं कि कमउम्र बच्चों को वाहन न चलाने दें। हेलमेट या सीट बेल्ट का इस्तेमाल वाहन चलाते समय अवश्य करें और यातायात नियमों का पूरी तरह पालन करें।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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