नई दिल्ली, जेएनएन। सत्रहवीं लोकसभा के पहले ही सत्र में सरकार कई अहम विधेयक पेश करेगी। इनमें तीन तलाक और कश्मीर आरक्षण विधेयक अहम होगा। जबकि केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के विधेयक को भी बुधवार को कैबिनेट की मंजूरी दे दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक विधेयक पारित कर दिये गये।

कैबिनेट की बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देने आये केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि मंजूर किये गये विधेयकों को संसद में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों की ओर से इन विधेयकों को लेकर जो आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, उनका भी संज्ञान लिया जाएगा। इन मुद्दों पर पहले से ही अध्यादेश लागू था। अब सत्र में इसे पारित कराकर कानून का रूप देने की कोशिश होगी।

तीन तलाक जहां महिलाओं में बराबरी के लिए बड़ा सामाजिक कदम है। सरकार दो बार तीन तलाक पर अध्यादेश लागू कर चुकी है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अध्यादेश 2019 के तहत एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी रहेगा और ऐसा करने वाले पति के लिए तीन साल के कारावास का प्रावधान किया गया है।

वहीं केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए आरक्षण में विभाग की बजाय विश्वविद्यालय को इकाई माना गया है। इलाहाबाद कोर्ट के फैसले में विभाग को इकाई बनाया गया था जिसका राजनीतिक रूप से विरोध हुआ था। इसे दलित विरोधी ठहराने की कोशिश हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाई थी। लेकिन सरकार इसे पलटते हुए अध्यादेश लेकर आई थी।

इस नये विधेयक के तहत भर्ती के पुराने आरक्षण के साथ आर्थिक आधार पर दिये गये 10 फीसद को भी शामिल कर लिया गया है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालयों में लगभग सात हजार पदों पर भर्ती होनी है। इससे शिक्षक वर्ग की भर्ती होने से सात हजार मौजूदा रिक्तियों को भरने का रास्ता खुल जाएगा

कैबिनेट के एक अन्य फैसले में जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोग प्रत्यक्ष भर्ती, पदोन्नति और विभिन्न पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश पा सकते हैं। इससे पहले यह आरक्षण केवल एलओसी के करीब रहने वाले गांवों को ही मिलता था। इस प्रावधान से आरक्षण का लाभ 435 गांवों समेत साढे़ तीन लाख से अधिक लोगों को मिलेगा।

बैंकों में खाता खोलने और मोबाइल नंबर प्राप्त करने के लिए आधार को स्वैच्छिक तौर पर पहचान पत्र मानने वाले विधेयक को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। आधार संशोधन विधेयक-2019 को संसद के आगामी सत्र में पेश किये जाने की संभावना है। यह विधेयक पहले से जारी अध्यादेश की जगह लेगा।

एसईजेड संशोधन विधेयक के जरिए इसका प्रावधान होगा कि केंद्र सरकार के अधिकृत कोई भी ट्रस्ट एसईजेड में इकाई स्थापित कर सकेगा।

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Posted By: Krishna Bihari Singh