विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'भारतीयों को होगी परेशानी...' विदेशी फंडिंग कानून पर शशि थरूर ने केंद्र सरकार को घेरा

Published: Thu, 06 Aug 2026 11:40 AM (IST)

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'विदेशी फंडिंग संशोधन विधेयक, 2026' की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे भारतीय राज्य और ...और पढ़ें

शशि थरूर ने विदेशी फंडिंग कानून पर केंद्र सरकार को घेरा (स्क्रीनग्रैब)

शशि थरूर ने विदेशी फंडिंग कानून पर केंद्र सरकार को घेरा (स्क्रीनग्रैब)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए जाने वाले 'विदेशी फंडिंग संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA ) की तीखी आलोचना की है। थरूर ने आरोप लगाया कि यह यह विधेयक भारतीय राज्य और नागरिक समाज के बीच के संबंधों को मौलिक रूप से बदलने की कोशिश है।

शशि थरूर ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक भारतीय राज्य और नागरिक समाज के संबंधों को पूरी तरह से बदलने और कार्यकारी शक्तियों का केंद्रीकरण करने की एक खतरनाक कोशिश है। इससे भारतीय नागरिक समाज और संस्थानों को परेशानी होगी।

'गैर-लाभकारी संस्थाओं पर निशाना

शशि थरूर ने एक अंग्रेजी न्यूज पेपर में अपने लेख में आरोप लगाया, "मौजूदा सरकार ने गैर-लाभकारी संस्थाओं, विचारकों और मानवाधिकार समूहों को विकास साझेदारों के बजाय विध्वंस और विदेशी हेरफेर के स्रोत के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है।

इन आवाजों को दबाने के लिए, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परोपकार पर उनकी निर्भरता पर उनकी सबसे बड़ी कमजोरी को निशाना बनाया है।"

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 सरकार को एक नामित प्राधिकरण बनाने का अधिकार देता है, यह किसी संगठन के एफसीआरए पंजीकरण रद होने, आत्मसमर्पण करने या नवीनीकरण न होने के कारण समाप्त होने की स्थिति में विदेशी अंशदान और विदेशी अंशदान से निर्मित संपत्तियों के प्रबंधन का कार्यभार संभालेगा।

विधेयक में यह भी कहा गया है कि पूजा स्थल जैसी संपत्तियों के मामले में, प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका धार्मिक स्वरूप बरकरार रहे।

सरकार ने पहले ही थोप दिया बोझ

थरूर ने कहा, "विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में आक्रामक प्रवर्तन और व्यापक संशोधनों के माध्यम से, सरकार ने पहले ही जटिल अनुपालन बोझ थोप दिए हैं, जैसे कि जमीनी स्तर के संगठनों को उप-अनुदान पर प्रतिबंध लगाना, अनुमत प्रशासनिक व्यय में कटौती करना और सभी विदेशी प्रवाह के लिए नई दिल्ली में एक ही बैंक शाखा को अनिवार्य करना।"

थरूर ने आगे कहा कि इस विनियमन के चलते विदेशी वित्तपोषण में 87 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे हजारों धर्मनिरपेक्ष और समुदाय-आधारित संगठनों को बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि नए कानून में राज्य को संपत्ति पर कब्जा करने की अनुमति देने वाला प्रावधान इन संस्थानों से लाभान्वित होने वाले लोगों के हितों के लिए हानिकारक होगा।

स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में कर रहे अच्छा काम

थरूर ने कहा कि यह संशोधन नियंत्रण का एक अभूतपूर्व तंत्र पेश करता है, यह पारंपरिक कानूनी सुरक्षा को दरकिनार करता है। केरल में अपने अनुभव का हवाला देते हुए, थरूर ने बताया कि ईसाई धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा संचालित धर्मार्थ ट्रस्टों ने एक सदी से अधिक समय से स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में अच्छा काम किया है, और एफसीआरए कानून में संशोधन इन संस्थानों को "अस्थिर" करने की धमकी देता है।

थरूर ने कहा, "भारत के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के लिए पीढ़ियों से समर्पित संस्थानों को इस तरह के दंडात्मक वैधानिक तंत्रों के अधीन करना घोर अन्याय है। भारत में चर्च और संबद्ध धर्मार्थ संगठनों का योगदान लाखों लोगों के उत्थान, शिक्षा और स्वास्थ्य लाभ में प्रमाणित है।"

इस विधेयक को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए थरूर ने विपक्ष से एकजुट होकर सदन में इसका विरोध करने का आग्रह किया है।

यह भी पढ़ें- परिसीमन और FCRA विधेयक पर सबकी नजर, मानसूत्र सत्र में बढ़ेगा सत्ता-विपक्ष में गतिरोध

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।