फिल्मों से सत्ता के गलियारों तक: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने ‘थलापति’ विजय का राजनीतिक सफर
थलापति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उनकी पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर बहुमत के लिए ...और पढ़ें

‘थलापति’ विजय का राजनीतिक सफर। (पीटीआई)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख जोसेफ सी विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक थलापति विजय के नाम से जानते हैं, अब आधिकारिक तौर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन गए हैं।
हालांकि सत्ता तक पहुंचने का उनका सफर किसी राजनीतिक ड्रामे से कम नहीं रहा। बहुमत जुटाने की जद्दोजहद, सहयोगियों की तलाश और लगातार राजनीतिक बैठकों के बीच आखिरकार विजय ने रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।
चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में विजय के साथ TVK के नौ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे।
चुनाव में शानदार शुरुआत, लेकिन बहुमत से दूर
4 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए तो विजय की पार्टी TVK ने सभी को चौंका दिया। पार्टी ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए। हालांकि, यह जीत ऐतिहासिक मानी गई, लेकिन पार्टी बहुमत के आंकड़े से 10 सीट पीछे रह गई। इसके बाद विजय को सरकार बनाने के लिए चुनाव बाद गठबंधन की राह अपनानी पड़ी।
सरकार बनाने के लिए चला कई दिनों तक सस्पेंस
चुनाव परिणाम आने के बाद कई दिनों तक तमिलनाडु की राजनीति में सस्पेंस बना रहा। TVK ने कांग्रेस से समर्थन मांगा, जिसने अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया। इसके बाद CPI और CPI(M) ने भी विजय का साथ दिया। शनिवार को विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन के बाद विजय बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रहे।

सूत्रों के मुताबिक, विजय ने शपथ लेने से पहले राज्यपाल आरवी अरलेकर से कम से कम चार बार मुलाकात की थी। आखिरकार, राज्यपाल ने सरकार गठन की मंजूरी दे दी।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि यदि 10 मई तक कोई सरकार नहीं बनती तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता था। ऐसे में विजय का बहुमत जुटाना समय के खिलाफ दौड़ जैसा माना गया।
सिनेमा से राजनीति तक का सफर
विजय का जन्म 1974 में हुआ था। वह फिल्मी परिवार से आते हैं। उनके पिता एसए चंद्रशेखर तमिल फिल्मों के निर्देशक हैं और उनकी मां शोभा चंद्रशेखर पार्श्व गायिका हैं।
विजय ने 1992 में फिल्म नालैया थीरपू से अभिनय की शुरुआत की। 1990 के दशक में उन्होंने रोमांटिक फिल्मों के जरिए लोकप्रियता हासिल की। पूवे उनाक्कागा, लव टुडे, कधालुक्कु मरियाधै और थुल्लाथा मनामुम थुल्लुम जैसी फिल्मों ने उन्हें युवाओं के बीच बड़ी पहचान दिलाई।
इसके बाद उन्होंने एक्शन फिल्मों की ओर रुख किया और घिल्ली, पोक्किरी, थिरुमलाई जैसी फिल्मों से सुपरस्टार बन गए। पिछले एक दशक में थुप्पक्की, कत्थी, मेर्सल, सरकार, मास्टर, लियो और ग्रेटेस्ट ऑल टाइम जैसी फिल्मों ने उन्हें तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर दिया।
राजनीति में एंट्री और फिल्मों को अलविदा
विजय ने 2024 में फिल्मों से दूरी बनाकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की स्थापना की। उनकी लोकप्रियता और बड़े फैन बेस ने उन्हें सीधे राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने युवाओं, मध्यम वर्ग और शहरी वोटरों के बीच मजबूत पकड़ बनाई, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला।
जना नायकन बनी विवादों का केंद्र
राजनीति में आने के बाद विजय की आखिरी फिल्म जना नायकन भी विवादों में घिर गई। यह फिल्म जनवरी में पोंगल के मौके पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से मंजूरी नहीं मिलने के कारण रिलीज टालनी पड़ी।
फिल्म के निर्माताओं ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन मामला अभी न्यायालय में लंबित है। अप्रैल में फिल्म ऑनलाइन लीक हो गई, जिससे तमिल फिल्म इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया।
इस फिल्म का निर्देशन एच विनोथ ने किया है और इसमें पूजा हेगड़े, ममिता बैजू और बॉबी देओल भी नजर आने वाले हैं। विजय ने आरोप लगाया था कि फिल्म की रिलीज में देरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और चुनाव के दौरान उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी खबरें भी जानबूझकर लीक की गईं।
फिल्मी पटकथा जैसा रहा सत्ता तक का सफर
विजय का मुख्यमंत्री बनने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। चुनावी जीत, बहुमत की कमी, सहयोगियों की तलाश और आखिरकार सत्ता तक पहुंच, पूरी प्रक्रिया ने तमिलनाडु की राजनीति को कई दिनों तक रोमांचक बनाए रखा।
