ब्रेन वॉश कर मलेशिया भेजने की रची साजिश, TCS नासिक मामले में निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
नासिक की एक अदालत ने यौन उत्पीड़न और मतांतरण से जुड़े मामले में टीसीएस कर्मचारी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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टीसीएस कर्मचारी निदा खान

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नासिक की एक अदालत ने यौन उत्पीड़न और मतांतरण से जुड़े मामले में टीसीएस कर्मचारी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि पीडि़ता का 'सुनियोजित तरीके से' बहला-फुसलाकर ब्रेन वॉश करना उसे मलेशिया भेजने की 'साजिश' प्रतीत होती है।
निदा की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता वास्तव में बहुआयामी है। इस मामले की तह तक जाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी का आदेश सोमवार को उपलब्ध हुआ। इसमें कहा गया है कि रिकार्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि पीडि़ता का नाम बदलने के बाद निदा खान उसे मलेशिया भेजना चाहती थी।
अभियोजन पक्ष द्वारा हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता पर जोर देने के बाद अदालत ने दो मई को खान की याचिका खारिज कर दी थी।एफआइआर के अनुसार, खान ने महिला कर्मचारियों को इस्लामी परंपराओं के अनुसार कपड़े पहनने और व्यवहार करने की सलाह दी थी। उसने अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत मांगी थी।
पुलिस ने बताया था कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में खान की तलाश जारी है। आदेश में कहा गया है कि आवेदक की भूमिका का उल्लेख एफआइआर में स्पष्ट रूप से किया गया है। इसमें उसकी संलिप्तता दिखाई देती है।
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि पीडि़ता को किसी भी धर्म को मानने और अपनी पसंद का नाम रखने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे इसके लिए बहकाया जाए और वह भी एक सुनियोजित साजिश के तहत।
देओलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में निदा खान और दो अन्य सह-आरोपितों दानिश शेख और तौसीफ पर विवाह का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने आदि के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, दानिश शेख ने विवाह का झूठा वादा कर पीडि़ता का यौन उत्पीड़न किया, जबकि तौसीफ ने बार-बार उससे यौन संबंध बनाने की मांग करते हुए और शेख के साथ उसके कथित संबंध को परिवार के सामने उजागर करने की धमकी देते हुए उसका यौन शोषण किया।
एफआईआर के अनुसार, खान ने अपने दोनों सह आरोपितों के साथ मिलकर पीडि़ता को डरा-धमकाकर और बार-बार उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर उसका मतांतरण कराने का प्रयास किया। पुलिस की ओर से पेश हुए जिला सरकारी अभियोजक एएस मिसर ने तर्क दिया कि पीडि़ता को आरोपितों के धार्मिक रीति-रिवाजों और दैनिक धार्मिक दिनचर्या का पालन करने के लिए मजबूर किया गया था।
जांच का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि पीडि़ता का नाम बदलकर हानिया रखने की योजना थी और उसे मलेशिया भेजने की भी योजना थी। इन परिस्थितियों में यह पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है कि क्या कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह इसमें शामिल है और क्या आवेदक निदा खान इससे जुड़ी हुई है।
