'मैं 62 साल का हूं, मेरी पत्नी है, थोड़ी नरमी बरतें'; रेप मामले में 10 साल की सजा मिलने के बाद तरुण तेजपाल ने खुद को बताया पीड़ित
तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के रेप केस में दोषी ...और पढ़ें

तरुण तेजपाल 2013 रेप केस में दोषी ठहराए गए (फोटो- ANI)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को 2013 में उनकी महिला जूनियर सहयोगी द्वारा दर्ज कराए गए रेप केस में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने दोषी ठहराया है और उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
तेजपाल को सरेंडर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। दोषी ठहराए जाने के बाद तरुण तेजपाल का बयान सामने आया है, जिसमें उसने खुद को पीड़ित बताया है। तेजपाल ने कहा कि वह इस मामले में ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।
तरुण तेजपाल ने कहा, "मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है और इसके अलावा कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें। बाकी तथ्य रिकॉर्ड पर रखे गए हैं।"
तेजपाल ने शुरू में घटना पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यह हालात को गलत समझने का नतीजा था। लेकिन आरोप लगने के बाद उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हुए हैं।
सुनवाई के दौरान जब जज ने पूछा कि क्या तेजपाल के खिलाफ कोई और मामला दर्ज है। तब तेजपाल के वकील ने कहा, "महोदय, कोई एफआईआर, शिकायत या दुर्व्यवहार नहीं हुआ है।"
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को उन्हें 2013 में उनकी जूनियर सहयोगी द्वारा दर्ज कराए गए रेप केस में दोषी ठहराया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, तहलका पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल पर उनकी पूर्व महिला जूनियर सहयोगी ने आरोप लगाया कि 7 और 8 नवंबर, 2013 को गोवा के एक होटल में 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल ने होटल की लिफ्ट में उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था।
इस मामले की सुनवाई 2017 में मपुसा की ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई थी और 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया गया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपील की।
वहीं आज यानी गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तरुण तेजपाल को उसके कनिष्ठ सहकर्मी द्वारा दायर 2013 के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया।
ना का मतलब 'ना' ही होता है- सॉलिसिटर जनरल
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अधिकतम सजा देने का आग्रह किया है। मेहता ने अदालत में कहा कि पीड़िता, जो तेजपाल की बेटी की उम्र की थी, के बार-बार मना करने के बावजूद उन्होंने दो दिनों तक अपराध किया।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अदालत को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि जब कोई लड़की 'ना' कहती है, तो उसका मतलब सिर्फ 'ना' ही होता है।
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