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रहमान की जीत पर पीएम मोदी के 3 शब्द: भारत के लिए चिंता या अवसर? Inside Story

Published: Fri, 13 Feb 2026 06:37 PM (IST)Updated: Fri, 13 Feb 2026 08:10 PM (IST)

बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान की बीएनपी को भारी जीत मिली है, जिससे शेख हसीना का लंबा शासन समाप्त हो ...और पढ़ें

रहमान की जीत पर पीएम मोदी के 3 शब्द (जागरण ग्राफिक्स)

रहमान की जीत पर पीएम मोदी के 3 शब्द (जागरण ग्राफिक्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। जुलाई 2024 की हिंसा के बाद देश में पहला यह चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लंबे शासन का अंत करने वाला साबित हुआ, जिसने उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।

अब तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को चुनाव में भारी जीत मिली है। इस जीत से  उनके आलोचकों को 'डार्क प्रिंस' की स्टोरी एक परियों की कहानी के अंत जैसी लगने लगी है। 

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तारिक रहमान के वापसी की कहानी

60 साल के तारिक रहमान राजनीतिक 'रॉयल्टी' का प्रतीक बन गये हैं। वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तारी के बाद साल 2017 में उन्होंने देश छोड़ दिया था।

17 सालों तक निर्वासन में रहने के बाद, दिसंबर 2025 में अपनी मां के निधन के बाद वे अपने देश वापस लौटे। उनका स्वागत भारी भीड़ ने उत्साह के साथ किया।

अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग के 'आई हैव अ ड्रीम' भाषण की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा, '...मेरे पास बांग्लादेश के लिए एक प्लान है, और BNP का चुनाव अभियान शुरू किया। अब भारत, दक्षिण एशिया और अमेरिका इस प्लान के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।

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भारत की पहली प्रतिक्रिया

शुक्रवार सुबह रहमान की जीत की खबर सामने आने के बाद भारत ने चीन या पाकिस्तान से पहले बांग्लादेश के नए नेता का स्वागत किया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम बांग्लादेश को लेकर पाकिस्तान के साथ किसी खींचतान में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान और BNP को जीत पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने रहमान की सरकार को 'डेमोक्रेटिक, प्रोग्रेसिव और इनक्लूसिव बांग्लादेश' का समर्थन देने का आश्वासन दिया।

यह संदेश साफ था, भारत पिछले 18 महीनों की अस्थिरता को भूलकर स्थिर संबंध बनाना चाहता है, जिसमें चीन-पाकिस्तान के साथ फ्लर्ट और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले शामिल हैं।

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भारत को किन-किन बातों की चिंता?

भारत ने इस चुनाव पर पैनी नजर रखी, क्योंकि नई सरकार के झुकाव से दक्षिण एशिया की भू-राजनीति प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए तीन मुख्य मुद्दे हैं

  • पाकिस्तान-चीन-बांग्लादेश गठजोड़ की संभावना, जो हसीना की तुलना में कम अनुकूल हो सकती है। इससे भारत की क्षेत्रीय पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
  • दूसरा, सीमा और आंतरिक सुरक्षा, जिसमें अवैध प्रवासन (बंगाल-असम चुनावों से पहले घरेलू राजनीति पर असर) और हिंदू-विरोधी भावनाएं शामिल हैं।
  • तीसरा, व्यापार, जहां भारत का 10 अरब डॉलर का अधिशेष है और वह बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री को 80% से अधिक कच्चा कपास सप्लाई करता है।

'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति में बदलाव

शेख हसीना के शासन में भारत-बांग्लादेश के बीच स्थिर संबंध थे, जो व्यापार, परिवहन, सीमा सुरक्षा और जल बंटवारे पर केंद्रित थे। हालांकि भारत हसीना को पसंद करता, लेकिन अब सत्ता परिवर्तन को स्वीकार कर रहा है।

रहमान ने भारत के हितों का सम्मान करने का वादा किया है, जो उनकी मां की 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति से बदलाव का संकेत है। BNP को साफ बहुमत जीत से कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन खत्म हो गया, जो भारत के लिए राहत है।

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पाक-चीन कनेक्शन का कितना असर?

जमात की गैरहाजिरी में रहमान की सरकार भारत के साथ कम द्वेष रख सकती है, लेकिन इतिहास लेन-देन वाले संबंधों की ओर इशारा करता है। बांग्लादेश, पाकिस्तान के साथ JF-17 फाइटर जेट सौदे पर बात कर सकता है। चीन की मोंगला पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स से सैन्य उपयोग की आशंका है।

सीमा पर अवैध घुसपैठ (जुलाई 2024 के बाद 1,000+ मामले) और ड्रग तस्करी असम-बंगाल चुनावों में मुद्दा बनेगी। हिंदू समुदाय पर 2,000+ हमले और 23 हत्याएं भारत की चिंता हैं। रहमान ने सुरक्षा का वादा किया है, लेकिन BNP का रूढ़िवादी जुड़ाव निगरानी का विषय है।