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स्वामित्व योजना से वित्तीय पूंजी बने गांवों के घर, मिला 1679 करोड़ का कर्ज

Published: Thu, 30 Apr 2026 10:30 PM (IST)

आईआईएम अहमदाबाद की रिपोर्ट के अनुसार, स्वामित्व योजना ने गांवों के घरों को वित्तीय पूंजी में बदल दिया है। इस ...और पढ़ें

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HighLights

  1. स्वामित्व योजना ने ग्रामीण घरों को वित्तीय पूंजी बनाया

  2. योजना के तहत 1679 करोड़ रुपये के ऋण वितरित

  3. आईआईएम अहमदाबाद रिपोर्ट ने संपत्ति विवादों में कमी बताई

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गांवों में आबादी क्षेत्र का भू-अभिलेख न होने के कारण गांवों के घर विवादों का कारण तो बनते थे, लेकिन वित्तीय दृष्टिकोण से वह कोई पूंजी नहीं थे। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद ने पंचायतीराज मंत्रालय की स्वामित्व योजना के धरातल पर प्रभाव का आकलन करते हुए रिपोर्ट में दावा किया है कि इस योजना के कारण ग्रामीणों को अपने घरों के जो प्रापर्टी कार्ड सरकार से मिले हैं, उससे यह घर अब वित्तीय पूंजी बन चुके हैं।

यही कारण है कि योजना के पूर्ण होने से पहले ही अब तक देशभर में इन प्रापर्टी कार्ड के आधार पर बैंक 1679 करोड़ रुपये के 10913 लोन दे चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस योजना के कारण संपत्ति के विवादों में अप्रत्याशित रूप से कमी देखी गई है।

ग्रामीण आबादी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे और मैपिंग के बाद राज्य सरकार के माध्यम से ग्रामीणों को उनके आवासीय क्षेत्र का संपत्ति कार्ड दिलाने के लिए मोदी सरकार ने वर्ष 2021 में स्वामित्व योजना शुरू की थी।

भू-अभिलेख की समान योजना होने के कारण पश्चिम बंगाल, बिहार, नगालैंड और मेघालय जैसे राज्य इसमें शामिल नहीं हुए, जबकि सिक्किम, तेलंगाना और तमिलनाडु भी अपनी योजनाओं के कारण सिर्फ पायलट फेज में ही भागीदार बने। इनके अलावा सभी राज्यों में इस योजना को लागू करते हुए अब तक 189814 गांवों में 31473480 संपत्ति कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस पर केंद्र सरकार का अब तक 472 करोड़ रुपया खर्च हुआ है।

योजना के वास्तविक परिणाम का आकलन आइआइएम अहमदाबाद ने किया है। संपत्ति कार्ड के ऐवज में मिले बैंक लोन के आंकड़े के साथ ही इसमें मध्य प्रदेश के 42 हजार गांवों के अध्ययन का निष्कर्ष बताया है कि स्वामित्व सर्वे के बाद यहां प्रति आवासीय संपत्ति कर्ज का मूल्य 22129 रुपये प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा है।

वहीं, प्रति ग्राम पंचायत संपत्ति कर राजस्व 4.71 प्रतिशत, ओन सोर्स रेवेन्यू 4.08 प्रतिशत और अन्य स्थानीय कर 7.57 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं। आवासीय संपत्तियों का नामांतरण भी 6.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है।

आईआईएम अहमदाबाद की ओर से यह भी दावा किया गया है कि आवासीय संपत्ति का स्पष्ट निर्धारण और संपत्ति कार्ड बन जाने से संपत्ति के विवादों में भी अप्रत्याशित रूप से कमी आई है। पंचायतीराज सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि योजना सेचुरेशन मोड पर पहुंचने के करीब है।

उसके बाद ग्रामीण आबादी क्षेत्र की आवासीय संपत्ति का कुल मूल्य लगभग 135 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक के मंच पर इस रिपोर्ट के प्रस्तुतीकरण से अन्य देश भी जान सकेंगे कि भारत में लैंड रिफार्म के लिहाज से स्वामित्व योजना कितनी कारगर साबित हुई है।