AI से बना रहा था नकली बैंकिंग एप और APK फाइल्स, सूरत साइबर क्राइम सेल ने यूपी से पकड़ा 18 साल का युवक
सूरत साइबर क्राइम सेल ने कानपुर से 18 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने AI का उपयोग कर नकली बैंकिंग एप और मैलवेयर APK फाइलें बनाईं।

सूरत साइबर क्राइम ने कानपुर से 18 साल के युवक को किया गिरफ्तार (फोटो-सोशल मीडिया)
HighLights
कानपुर के युवक ने AI से बनाए नकली बैंकिंग एप।
देश भर के साइबर अपराधियों को बेचता था ये एप।
सूरत साइबर क्राइम सेल ने कानपुर से किया गिरफ्तार।
डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात की सूरत साइबर क्राइम सेल ने उत्तर प्रदेश के कानपुर से 18 साल के युवक को गिरफ्तार किया है। इस युवक पर आरोप है कि उसने देश भर के साइबर अपराधियों के लिए नकली बैंकिंग एप्लिकेशन और मैलवेयर वाली APK फाइलें बनाईं और उन्हें सप्लाई किया।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी ने सिर्फ 11वीं तक पढ़ाई की थी, फिर भी उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेलीग्राम का इस्तेमाल करके ऐसे एडवांस्ड टूल्स बनाए जिनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया गया।
कानपुर से गिरफ्तार हुआ साइबर अपराधी
कानपुर से गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक, उसने 16 साल की उम्र में AI टूल्स और टेलीग्राम की मदद से खतरनाक APK फाइलें बनाना शुरू कर दिया था। इन एप्लिकेशन्स का इस्तेमाल मोबाइल फोन को हैक करने और डेटा की चोरी में किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि झारखंड के जामताड़ा से काम करने वाले कई साइबर क्राइम गैंग, साथ ही हरियाणा और राजस्थान के ग्रुप्स भी उससे वायरस वाले एप्लिकेशन ले रहे थे।
कैसे हुआ नेटवर्क का भंडाफोड़?
सूरत में साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया। मई 2026 में, एक पीड़ित को WhatsApp पर एक APK फाइल मिली जो पंजाब नेशनल बैंक के ऑफिशियल 'PNB One' एप्लिकेशन जैसी ही दिखती थी।
असली समझकर पीड़ित ने एप डाउनलोड और इंस्टॉल किया। ये एप इंस्टॉल करने के कुछ ही देर बाद पीड़ित का मोबाइल फोन हैक हो गया और प्राइम को-ऑपरेटिव बैंक में उसके अकाउंट से यूनियन बैंक के एक अकाउंट में कुछ ही मिनटों में पांच लाख रुपये ट्रांसफर हो गए।
शिकायत मिलने के बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने जांच शुरू की। जांच के दौरान अधिकारी इस ऑपरेशन के मास्टरमाइंड तक पहुंचे। साइबर क्राइम अधिकारियों और IT एक्सपर्ट्स की टीम ने कानपुर के एक होटल में छापा मारा और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी का लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस भी जब्त कर लिए। पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को पता चला कि आरोपी ने दो तरह के एप्लिकेशन बनाए थे।
पहला एप्लिकेशन पीड़ित के डिवाइस पर इंस्टॉल करने के लिए बनाया गया था, जबकि दूसरा एडमिन एप्लिकेशन के तौर पर काम करता था। एडमिन एप के जरिए, साइबर अपराधी पीड़ित के मोबाइल फोन से OTP, बैंकिंग डिटेल्स और दूसरी जरूरी जानकारी रियल-टाइम में देख सकते थे।
जांच में इस ऑपरेशन के पीछे के बिजनेस मॉडल का भी पता चला। पुलिस ने बताया कि आरोपी सब्सक्रिप्शन-आधारित सिस्टम पर काम करता था। वह सॉफ्टवेयर को पहली बार इंस्टॉल करने के लिए 15,000 रुपये और आगे की सर्विस के लिए हर महीने अतिरिक्त 15,000 रुपये लेता था।
