नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सबरीमाला फैसले पर दायर समीक्षा याचिका की सुनवाई वह 30 जनवरी तक नहीं कर सकता है। सुनवाई करने वाली पीठ में शामिल एक न्यायाधीश चिकित्सकीय अवकाश पर हैं इसीलिए कोर्ट ने असमर्थता जताई है। शीर्ष कोर्ट ने 28 सितंबर को सुनाए गए अपने फैसले में मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।

28 सितंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने 4:1 से फैसला सुनाया था। सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को कोर्ट ने लैंगिक भेदभाव वाला बताया था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को कहा कि जस्टिस इंदु मल्होत्रा कुछ चिकित्सकीय कारणों से 30 जनवरी तक अवकाश पर हैं। जस्टिस मल्होत्रा उस पांच सदस्यीय संविधान पीठ की अकेली महिला सदस्य हैं जिसने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। जस्टिस मल्होत्रा ने मामले में असहमति से फैसला दिया था।

राष्ट्रीय अयप्पा श्रद्धालु संघ की ओर से पेश वकील मैथ्यू जे. नेदुंपारा ने पीठ के सामने मामले का उल्लेख किया। इस पीठ में जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस संजीव खन्ना भी शामिल थे। वकील ने याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस मल्होत्रा के आने के बाद ही अगली तारीख तय की जाएगी।

सुनवाई करने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस मल्होत्रा शामिल हैं। इस पीठ को मंगलवार से ही सुनवाई शुरू करनी थी।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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