नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्यप्रदेश समेत 11 राज्यों में रेरा (रियल स्टेट रेगुलेशन एंड डेवलेप्मेंट) एक्ट लागू करने संबंधी जवाब चार हफ्तों में मांगा है, अन्यथा इन राज्यों के प्रधान सचिवों (जो हाउसिंग विभाग के प्रभारी भी हैं) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और हिमा कोहली की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि अगर राज्य सरकारें जवाब देने में विफल रहती हैं तो उनके प्रधान सचिवों को निजी तौर पर अदालत में पेश होना होगा। साथ ही उन्हें बताना होगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

दो सितंबर तक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विगत 12 अगस्त के पिछले आदेश के बावजूद दो सितंबर तक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया। उत्तर प्रदेश, बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मिजोरम और ओडिशा ने अब तक सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। सर्वोच्च अदालत के आदेश के अनुसार जिन राज्यों ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है, उन्हें ऐसा अब से चार हफ्ते में करना होगा।

अन्यथा राज्यों के प्रधान सचिवों की होगी पेशी

अगर ऐसा नहीं हुआ तो इन राज्यों के प्रधान सचिवों और शहरी विकास मंत्रालय को व्यक्तिगत तौर पर अगली सुनवाई होने पर अदालत में पेश रहना होगा। ताकि वह यह बताएं कि अदालत उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न करे। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने रेरा अधिनियम, 2016 को लागू करने के संबंध में केंद्र सरकार के उठाए सवालों का जवाब देने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तलब किया था। इस याचिका वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर किया था। इसमें बिल्डर-बायर एग्रीमेंट और माडल एजेंट-बायर एग्रीमेंट का मसौदा तैयार करने के दिशा-निर्देश देने की मांग की गई थी।

Edited By: Arun kumar Singh

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