विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी में वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के थोक आवेदनों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को दिए जांच के आदेश

Published: Fri, 30 Oct 2026 08:27 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के थोक आवेदनों पर चुनाव आयोग को जांच और सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया है।

उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम हटाने के थोक आवेदनों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त।

उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम हटाने के थोक आवेदनों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मतदाता सूची अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाया।

  2. चुनाव आयोग को थोक फार्म-7 आवेदनों की जांच का निर्देश।

  3. याचिकाकर्ताओं को अनियमितताओं का ब्योरा आयोग को सौंपने को कहा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग की चुनावी तैयारियों के बीच प्रदेश के मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी थोक आवेदनों के आरोप पर सख्त रुख अपनाया है।

सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग से उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान फार्म-सात आवेदन थोक में जमा किए जाने से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों की जांच करने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है। फार्म-7 वह आवेदन है, जिसके जरिये मसौदा मतदाता सूची से किसी मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध किया जाता है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने शुक्रवार को याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे ऐसी अनियमितताओं का ब्योरा देते हुए चुनाव आयोग को समाधान नहीं होने का नोट सौंपें। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को खत्म हो रहा है।

चुनाव आयोग को चुनाव प्रकिया की शुरुआत इस निर्धारित अवधि से छह महीने पहले शुरू करा देनी होती है। लिहाजा, अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने चुनाव संबंधी अपनी तैयारियां जोर-शोर से शुरु कर दी हैं। इसी के साथ-साथ एसआइआर की प्रक्रिया भी प्रदेश में पूरी की जा चुकी है।

अदालत ने निर्देश दिया, 'अदालत के संज्ञान में लाई गई अनियमितताओं का ब्योरा एक नोट के रूप में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील को सौंपा जाए। नोट मिलने के बाद चुनाव आयोग तथ्यों की जांच करे, जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।' एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि फार्म-7 का यह मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा है।

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने माना कि फार्म-7 के कई आवेदन थोक में जमा किए गए थे, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की गई। नायडू ने अदालत से कहा, 'हमने पाया कि फार्म-सात के कई आवेदन थोक में जमा किए गए थे। हमारे अधिकारियों ने उनकी जांच और दोबारा जांच की। वे फर्जी थे और हमने उन पर कार्रवाई नहीं की।'

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि एक विधानसभा क्षेत्र में किसी खास समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए 32 फार्म जमा किए गए थे। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से मामले की जांच करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और अन्य की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें उत्तर प्रदेश में एसआइआर की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार

यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूपी SIR का मामला, वोटरों के नाम काटने की कोशिश के आरोप पर ECI से मांगी रिपोर्ट

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।