'हमें मजबूर न करें...', रिलीफ कैंपों में हुई मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के राहत कैंपों में अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई।

मणिपुर में हुई मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त। (फाइल फोटो।)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राहत कैंपों में मौतों पर चिंता जताई।
राज्य सरकार को 25 संदिग्ध मौतों पर रिपोर्ट देने का आदेश।
सभी संदिग्ध मौतों के लिए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मणिपुर के राहत कैंपों में कथित अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न के मामलों पर चिंता जताई। राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को सभी 25 संदिग्ध मौतों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौत के कारणों से जुड़े दस्तावेज शामिल हों।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और कार्यवाही से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत ने उठाए गंभीर सवाल
जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने राहत कैंपों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
कोर्ट ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से उस जानकारी के बारे में भी सवाल किया जो कमेटी ने 4 जुलाई को रिलीफ कैंपों में रह रहे विस्थापित लोगों की 25 अप्राकृतिक मौतों के संबंध में मांगी थी।
'अदालत को आदेश जारी करने के लिए मजबूर न करें'
सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार से कहा, "अपने मुख्य सचिव से कहें कि वे अदालत को आदेश जारी करने के लिए मजबूर न करें। हमें बताएं कि आपने क्या कदम उठाए हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वह मीडिया में बताई गई राहत शिविरों में हुई सभी 25 संदिग्ध मौतों की पूरी जानकारी दे।
कोर्ट के आदेश में बताई गई रिपोर्ट के अनुसार, आठ जिलों में बने राहत कैंपों में 640 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से सिर्फ 20 मामलों में ही पोस्टमॉर्टम किया गया, जबकि आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि सिर्फ 20 पोस्टमार्टम क्यों किए गए और कई मामलों में सिर्फ 20,000 से 30,000 रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया। मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी संदिग्ध मौतों के लिए एफआईआर दर्ज की जाए और मौत के कारणों की ठीक से जांच की जाए।
एएसजी ने कोर्ट को क्या बताया?
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि आठ जिलों में 42 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें बनाई गई हैं। कुल 3,020 मामलों की जांच चल रही है। 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई हैं और 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई हैं। 1,135 मामलों में जांच जारी है, जबकि 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है।
पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने बताया कि गुवाहाटी की स्पेशल कोर्ट हफ्ते में सिर्फ दो दिन मामलों की सुनवाई कर रही है। इसके जवाब में चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि हफ्ते में दो दिन सुनवाई होने से भी मुकदमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन सीबीआई के मामलों की सुनवाई के लिए दो स्पेशल कोर्ट बनाने की संभावना पर भी विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट की जरूरतों को पूरा करने पर तुरंत विचार करे।
