'प्रभावित पक्ष सोशल मीडिया से कोर्ट क्लिप हटवाने की कर सकता है मांग', सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड होने पर पीड़ित व्यक्ति IT एक्ट के तहत उन्हें हटवा सकता है।

कोर्ट क्लिप सोशल मीडिया पर डालने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी। (फाइल फोटो।)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो क्लिप के इस्तेमाल पर लगी रोक के बारे में एक अहम स्पष्टीकरण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर ऐसा फुटेज सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाता है तो पीड़ित व्यक्ति इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी एक्ट (IT एक्ट) के तहत अधिकारियों से संपर्क करके उस कंटेंट को हटाने का आदेश मांग सकता है।
यह स्पष्टीकरण सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस वकील की 1 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के सामने अपने पिता (जिन पर जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप था) की ओर से दी गई दलीलें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं।
याचिका में क्या कहा गया?
वकील के वकील ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कार्यवाही का अनधिकृत प्रसार उनके जीवन, स्वतंत्रता, सम्मान और निजता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, "ऐसे प्रसार पर रोक लगाने के स्पष्ट न्यायिक आदेशों के बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विवादित वीडियो का लगातार उपलब्ध रहना याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों को लगातार और अपूरणीय क्षति पहुंचाता है।"
बेंच ने क्या कहा?
बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को बैन का आदेश दिया था। वकील आईटी एक्ट के तहत अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं और डिजिटल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उस आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का आदेश मांग सकते हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद फैलाया जा रहा है। सीजेआई कांत ने कहा कि वकील के पास एक असरदार उपाय मौजूद है और उन्हें उसका इस्तेमाल करना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अगर कोई सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग के फुटेज का इस्तेमाल करता है और उसमें अपनी तरफ से कोई बात जोड़ता है या क्लिप्स को चुन-चुनकर इस तरह दिखाता है जिससे कोई अलग मतलब निकले तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और यह कोर्ट की अवमानना भी हो सकता है।
CJI ने कहा, "अगर कोई कोर्ट की कही बातों में कुछ जोड़ता है या कार्यवाही को इस तरह पेश करता है जिससे विवाद पैदा हो तो हम ऐसी हरकतों को बहुत गंभीरता से लेंगे।"
बेंच ने वकील को सलाह दी कि वे आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत अधिकारियों से संपर्क करें या सीधे डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजें।
यह भी पढ़ें: वन कानून पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: 2023 के संशोधन कानून की वैधता पर ही होगी सुनवाई, व्यक्तिगत मुकदमों पर रोक
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।