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'क्रूरता पर गलत सहानुभूति बर्दाश्त नहीं', दो दोषियों को प्रोबेशन पर रिहा करने पर इलाहाबाद HC से सुप्रीम कोर्ट नाराज

Published: Thu, 22 Oct 2026 07:21 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने बहराइच में 2003 के चाकू-बंदूक हमले के दोषियों को प्रोबेशन पर रिहा करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के प्रोबेशन आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के प्रोबेशन आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई

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पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में साल 2003 में चाकू और बंदूक से किए गए हमले के मामले में दोषी ठहराए गए दो लोगों को 'अच्छे आचरण' से जुड़ी धारा के तहत प्रोबेशन पर रिहा करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाई है।

जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्रूरता पर 'गलत सहानुभूति' बर्दाश्त नहीं। अपराध की 'क्रूरता' को नजरअंदाज कर दी गई 'गलत सहानुभूति' के चलते दोनों एक भी दिन जेल की सजा काटे बिना खुलेआम घूम रहे हैं, जो न्याय व्यवस्था के साथ भद्दा मजाक है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के प्रोबेशन आदेश पर नाराजगी जताई

व्यापारिक रंजिश में चाकू और बंदूक से किया गया था बर्बर हमला यह सनसनीखेज मामला व्यापारिक रंजिश से जुड़ा है, जहां बहराइच में पीड़ित ने इन दोनों की दुकान के पास अपनी दुकान खोली थी।

घटना के दिन एक ने धारदार हथियार और दूसरे ने बंदूक से पीड़ित पर बेरहमी से हमला किया, जिससे वह बेहोश होकर गिर गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने मामले को बेहद कैजुअल तरीके से लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि हाईकोर्ट ने माना कि ये दोनों 22 साल से भुगत रहे हैं, जबकि हकीकत यह थी कि वे जमानत पर बाहर रहकर लगातार अपराध कर रहे थे, और पीड़ित दिन-रात उस हमले के दर्द को झेल रहा था।

दो हफ्ते में करें सरेंडर, हिरासत के बाद ही होगी अपील पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध की प्रकृति और अपराधी का चरित्र यह तय करने का मुख्य पैमाना होना चाहिए कि उसे रिहा किया जाए या नहीं, जो इस मामले में नदारद है।

'गलत सहानुभूति' को न्याय व्यवस्था के साथ भद्दा मजाक बताया

कोर्ट ने प्रोबेशन ऑफ आफेंडर्स एक्ट की धारा 4 के गलत इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। साथ ही, ट्रायल कोर्ट द्वारा धारा 307 के बजाय धारा 308 के तहत आरोप तय करने को भी गलत बताया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए दोनों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का सख्त निर्देश दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा न करने पर बहराइच का अतिरिक्त सत्र न्यायालय तुरंत उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई शुरू करेगा। साथ ही, आपराधिक अपील को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बहाल कर यह निर्देश दिया गया कि अपील पर सुनवाई तभी होगी जब दोनों पुलिस हिरासत में लिए जाएं।

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