विधायी विशेषाधिकार बनाम अभिव्यक्ति की आजादी: सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच बंद कर सकती है 23 साल पुराना मामला
सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच तमिलनाडु विधानसभा के पत्रकारों के खिलाफ 23 साल पुराने विशेषाधिकार हनन मामले को बंद कर सकती है।
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23 साल पुराने मामले को बंद कर सकता है सुप्रीम कोर्ट
HighLights
सुप्रीम कोर्ट 23 साल पुराने विशेषाधिकार हनन मामले को बंद करेगा।
तमिलनाडु विधानसभा ने पत्रकारों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था।
विधानसभा ने 2004 में प्रस्ताव वापस लिया, मामला अब औपचारिकता।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा ने कुछ पत्रकारों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पारित करने के बाद उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। इस मामले को 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच बंद कर सकती है।
ये मामला मीडिया की अभिव्यक्ति की आजादी और विधायी विशेषाधिकार के दायरे के बीच कानूनी लड़ाई की तरह लग रहा था, जो कि अब सिर्फ रिकॉर्ड के लिए एक औपचारिकता दिखाई दे रहा है।
23 साल पुराने मामले में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सात जजों CJI सूर्यकांत, जस्टिस अरविंद कुमार, प्रशांत कुमार मिश्रा, जॉयमाल्य बागची, विपुल एम. पंचोली, श्री चंद्रशेखर और वी. मोहना की बेंच 'द हिंदू' और 'मुरासोली' अखबारों के तत्कालीन संपादक एन. रवि और एस. सेल्वम द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
7 नवंबर, 2003 के विधानसभा प्रस्ताव के बाद, दोनों संपादकों और कुछ पत्रकारों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। CJI सूर्यकांत ने कहा कि सात जजों की बेंच मंगलवार को बैठेगी, 2004 के प्रस्ताव को रिकॉर्ड पर लेगी और याचिकाओं का निपटारा करेगी।
TN विधानसभा की ओर से, सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने, जिनके साथ अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी थे।
उन्होंने CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच को बताया कि रिट याचिका का आधार अब खत्म हो गया है और यह मुद्दा अब केवल सैद्धांतिक रह गया है, क्योंकि विधानसभा ने 2004 में कुछ पत्रकारों को 15 दिन की सजा देने वाला प्रस्ताव वापस ले लिया था।
