विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया 60 साल पुराना बिजली विवाद, पंजाब और हरियाणा से हिमाचल को मिलेगी 11973 MU यूनिट

Published: Fri, 06 Nov 2026 12:39 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों पुराने ऊर्जा विवाद को सुलझाया है। इसके तहत पंजाब ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पुराना ऊर्जा विवाद सुलझाया।

  2. पंजाब, हरियाणा हिमाचल को देंगे 11,973 मिलियन यूनिट बिजली।

  3. यह भुगतान 20 वर्षों की अवधि में किया जाएगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों से चले आ रहे उस ऊर्जा विवाद को खत्म कर दिया। ये विवाद1966 से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके तहत पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को बकाया राशि का भुगतान बिजली (ऊर्जा) के रूप में करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था 2011 के उस फैसले के अनुरूप होगी, जिसमें 1966 से भाखड़ा नांगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े बिजली के बकाये को हिमाचल प्रदेश के पक्ष में 7.19 प्रतिशत की दर से तय किया गया था। अदालत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे।

पंजाब सरकार ने किया था विरोध

पंजाब सरकार ने शुरू में केंद्र के उस प्रस्ताव का विरोध किया था जिसमें 15 वर्षों में ऊर्जा बकाया चुकाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उसने इस योजना को 30 वर्षों में लागू करने का सुझाव दिया। वहीं, हिमाचल प्रदेश ने इसे 10 वर्षों के भीतर लागू करने की मांग की थी।

इस प्रस्ताव के तहत बांधों के निर्माण में आई पुरानी पूंजीगत लागत (कैपिटल कॉस्ट) के लिए 420 करोड़ रुपये का समायोजन (एडजस्टमेंट) किया गया है और अब हिमाचल प्रदेश को पंजाब या हरियाणा को कोई भुगतान नहीं करना होगा।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी) ने मूल हकदारी की गणना 13,066 मिलियन यूनिट के रूप में की थी। अदालत के 2011 के फैसले के अनुसार, हिमाचल का हिस्सा 7.19 प्रतिशत तय किया गया था, जबकि पंजाब का हिस्सा 51.80 प्रतिशत और हरियाणा का हिस्सा 37.51 प्रतिशत निर्धारित किया गया था।

राजस्थान का हिस्सा लगभग अपरिवर्तित रहा, जबकि चंडीगढ़ का हिस्सा 3.50 प्रतिशत तय किया गया था। 2011 के फैसले के मुताबिक, हिमाचल को भाखड़ा परियोजना में 1 नवंबर 1966 से, देहर परियोजना में नवंबर 1977 से और पोंग बांध परियोजना में जनवरी 1978 से हिस्सा मिलना था।

यह भी पढ़ें: 'उम्मीद है आप मौसम का आनंद ले रहे होंगे...', दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का तंज

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।