नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या उसके यहां 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कैदियों, जिन्हें लंबे ट्रायल के बाद सजा हुई हो, की समय पूर्व रिहाई के बारे में कोई नीति है? प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हत्या के प्रयास में पांच साल जेल की सजा पाए 80 वर्षीय केदार यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने केदार यादव के वकील पीवी योगेश्वरन और आशीष कुमार उपाध्याय को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि दोषी 80 वर्ष का है। कोर्ट ने कहा कि जिस मामले में अभियुक्त को दोषी ठहराया गया है, वह घटना 1985 की है और मामले में हाई कोर्ट का अंतिम आदेश 2019 में आया। पीठ ने कहा कि इन सभी विशिष्ट परिस्थितियों पर विचार करने के बाद वह प्रदेश सरकार को सीमित मुद्दे पर नोटिस जारी कर रही है।

इस मामले में उत्तर प्रदेश के देवरिया महाराजगंज के पुरैना गांव में रहने वाले केदार यादव को हत्या के प्रयास के जुर्म में पांच साल के कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। सत्र अदालत से केदार यादव को 1991 में सजा हो गई थी। उसने सजा के खिलाफ अपील की, जो खारिज हो गई। अपील खारिज होने के बाद केदार यादव ने हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिसे हाई कोर्ट ने 2019 में खारिज कर दिया।

इसके बाद केदार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है, जिस पर अदालत ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने में हुई 442 दिन की देरी माफ कर दी है। केदार यादव के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में सजा को चुनौती देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 80 वर्ष का है और उसे कई बीमारियां हैं। कोर्ट उसकी आयु और बीमारियों पर विचार करते हुए रहम करे।