नई दिल्ली, पीटीआइ। देश के इलेक्ट्रानिक मीडिया, चैनलों और नेटवर्क के खिलाफ शिकायतों पर सुनवाई के लिए एक मीडिया ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, प्रेस काउंसिल आफ इंडिया (पीसीआइ) और न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि मीडिया, खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया, एक बेलगाम घोड़े की तरह हो गया है, जिसे नियंत्रित किए जाने की आवश्यकता है।

याचिका पर प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूíत वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट से मीडिया व्यवसाय नियमों से संबंधित संपूर्ण कानूनी ढांचे पर गौर करने और दिशानिर्देशों पर सुझाव देने के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश या शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की अपील की गई।

कोर्ट ने इस संबंध में न्यूज ब्राडकास्टर्स फेडरेशन (एनबीएफ) और न्यूज ब्राडकास्टिंग स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (एनबीएसए) को भी नोटिस जारी किया। याचिका फिल्म निर्माता नीलेश नवलखा और सिविल इंजीनियर नितिन मेमाने ने संयुक्त रूप से दायर की। पीठ ने याचिका को इसी मामले पर लंबित अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया।

याचिका में कहा गया कि यह मीडिया के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाने के लिए नहीं है। यह केवल गलत सूचना, भड़काऊ कवरेज, फर्जी समाचार और निजता के उल्लंघन पर जवाबदेही के लिए है। कहा गया कि आजकल किसी मामले को लेकर मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है।

मीडिया ट्रायल न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह न्यायिक प्रणाली को भी प्रभावित करता है। इससे आरोपित के अधिकार भी प्रभावित होते हैं। याचिका में इसको लेकर दिशानिर्देशों को तैयार करने की अपील की गई। कहा गया कि यदि ट्रिब्यूनल का गठन हो जाता है तो मीडिया से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो सकती है और उनका समाधान हो सकता है। 

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