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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 60 लाख में से 47 लाख आपत्तियां निपट जाने पर जताया संतोष

Published: Wed, 01 Apr 2026 08:52 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में 47 लाख से अधिक आपत्तियों के निपटारे पर संतोष व्यक्त किया है।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया (फोटो-पीटीआई)

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में 47 लाख आपत्तियां निपटाई गईं।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने निपटारे पर संतोष व्यक्त किया, 7 अप्रैल तक सुनवाई।

  3. अपीलीय ट्रिब्यूनलों को चुनाव आयोग रिकॉर्ड तक पहुंच का निर्देश।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों द्वारा 31 मार्च तक 47 लाख से ज्यादा आपत्तियां निपटा दिये जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने संतोष और खुशी जताई।

कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि 60 लाख में से लगभग 47.4 लाख आपत्तियां निपटाई जा चुकी हैं और सात अप्रैल तक सारी आपत्तियां निपटा ली जाएंगी।

7 अप्रैल को फिर होगी सुनवाई

शीर्ष अदालत ने सभी आपत्तियां निपट जाने को ध्यान में रखते हुए मामले को सात अप्रैल को ही फिर सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया है।

टीएमसी नेताओं की ओर से भारी संख्या में फार्म छह जमा कराने और नये मतदाताओं को जोड़े जाने का मुद्दा उठाने पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा हमेशा होता है पर आप आपत्ति कर सकते हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन नहीं है और इस संबंध में ट्रिब्युनल के समक्ष आपत्ति कर सकते हैं।

कोलकाता हाई कोर्ट की ओर से शीर्ष अदालत को सूचित किया गया कि अपीलों पर सुनवाई के लिए 19 अपीलीय ट्रिब्युनलों के गठन की अधिसूचना जारी हो गई है। इन ट्रिब्युनलों में हाई कोर्ट के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश या सेवानिवृत न्यायाधीश अपीलों का निपटारा करेंगे।

चुनाव आयोग और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से अपीलीय ट्रिब्युनलों के लिए उपयुक्त परिसरों का निरीक्षण किया और पाया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जल एवं स्वच्छता संस्थान इसके लिए सबसे उपयुक्त है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपीलीय ट्रिब्युनलों को चुनाव आयोग के रिकार्ड तक पूरी पहुंच दी जाए। जिसमें आपत्तियों पर निर्णय लेते समय न्यायिक अधिकारियों द्वारा दर्ज किये गए कारण भी शामिल हों। ट्रिब्युनल प्राकृत न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप अपनी कार्य प्रणाली तय करेंगी लेकिन प्रामाणिकता की पुष्टि के बगैर नये दस्तावेज स्वीकार नहीं करेंगी।

कोर्ट ने साथ ही चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया कि ट्रिब्युनल के न्यायिक अधिकारियों, सदस्यों और कर्मचारियों का मानदेय और अन्य खर्च का समय पर भुगतान सुनिश्चित करें।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआइसआर से संबंधित टीएमसी नेताओं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिये।

चीफ जस्टिस ने बताया कि कोलकाता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजा है जिसमें बताया गया है कि 31 मार्च तक कुल मिलाकर 47.40 लाख आपत्तियों का निपटारा हो चुका है। 10 मार्च के बाद से 36 लाख आपत्तियों का निपटारा किया गया है। रोजाना करीब 1.75 लाख से लेकर दो लाख तक आपत्तियां निपटाई गई हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने मतदाता सूची में नाम जोड़े जाने और हटाए जाने को लेकर आपत्तियां उठाईं कहा कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए और जोड़े जा रहे हैं।

वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि करीब 45 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं और बड़ी संख्या में नये फार्म भरे जा रहे हैं। इस पर सीजेआइ ने कहा कि प्रतिद्वंदी पक्ष दावा करेंगे कि सौ फीसद समावेश या निष्कासन होना चाहिए।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ट्रिब्युनलों को मतदाता सूची में निष्कासन या समावेशन के मामलों को देखने देना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की आशंकाओं को अति तकनीकी बताते हुए उन्हें ट्रिब्युनल के समक्ष विशिष्ट आपत्तियां उठाने की सलाह दी।

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