'निजी संपत्ति पर भीड़ जुटा कर नमाज पढ़ना सही नहीं', इलाहाबाद हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ना सही नहीं है। न्यायालय ...और पढ़ें
-1775055352608_m.webp)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ना सही नहीं है। यह भी कहा कि शांति व्यवस्था भंग होने पर प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और लोक शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता।न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बरेली निवासी तारिक खान की याचिका निस्तारित करते हुए उक्त टिप्पणियां कीं। तारिक ने रमजान के दौरान निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने से रोक लगाने और शांति भंग में किए गए चालान को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
प्रकरण में कोर्ट के आदेश पर डीएम और एसएसपी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि याची व्यक्तिगत सुरक्षा की आड़ में नियमों का दुरुपयोग कर रहा है। हलफनामे और साक्ष्यों के माध्यम से अदालत को बताया कि याची की निजी संपत्ति पर प्रतिदिन 50-60 लोग नमाज के लिए एकत्रित हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र की सांप्रदायिक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो रहा है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना अधिकारियों का प्राथमिक कर्तव्य है और ऐसी प्रथाओं को जारी रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो सार्वजनिक शांति में व्यवधान डालें।इस पर याची की तरफ से अदालत को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में उक्त संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यदि दोबारा नमाज के बहाने भीड़ जुटाई जाती है, जिससे क्षेत्र की शांति प्रभावित होती है तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।
अदालत ने याची और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध 16 जनवरी, 2026 को जारी चालान तत्काल वापस लेने का निर्देश देते हुए मामले में पूर्व में जारी किए गए अवमानना नोटिसों को भी रद कर दिया। मकान मालिक हसीन खान ने अधिवक्ता के माध्यम से कहा कि उन्हें अब सुरक्षा की जरूरत नहीं है। इस पर कोर्ट ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश प्रशासन को दिया।
