नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में लोगों का विश्वास होना चाहिए। अदालत ने कहा कि जिन लोगों की भर्ती की जाती है, उनका इरादा सरकार के कामकाज से जुड़े सार्वजनिक कार्यों को पूरा करना होता है।

गड़बड़ी पाए जाने पर पूरी परीक्षा को रद करने से नि:संदेह कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि जहां पूरी चयन प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण पाई जाती है, इसके रद होने से निश्चित रूप से कुछ लोगों को कठिनाई हो सकती है, विशेषरूप से जो गड़बड़ी में शामिल नहीं हों।

पीठ ने आगे कहा- परीक्षा को रद करने के फैसले को अमान्य ठहराना पर्याप्त नहीं

पीठ ने आगे कहा, 'लेकिन यह एक परीक्षा को रद करने के फैसले को अमान्य ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसकी पूरी प्रक्रिया में इतनी गड़बड़ी की गई हो कि उस भर्ती परीक्षा की वैधता पर ही गंभीर प्रभाव पड़ा हो।'

अदालत ने कहा- सरकारी भर्ती प्रक्रिया में जनता का विश्वास होना चाहिए

अदालत ने कहा, 'सार्वजनिक सेवाओं के लिए भर्ती में लोगों का विश्वास हासिल करना चाहिए। भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों का इरादा सरकार के कामकाज से जुड़े सार्वजनिक कार्यों को पूरा करना होता है।'

हेड क्लर्क के लिए आयोजित परीक्षा को रद करने के दिल्ली सरकार का 2016 का फैसला सही

पीठ ने उक्त टिप्पणियां दिल्ली सरकार के 15 मार्च, 2016 के एक अध्यादेश को बरकरार रखते हुए की। इस अध्यादेश के जरिये दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) द्वारा हेड क्लर्क की भर्ती के लिए आयोजित की गई टियर-1 और टियर-2 परीक्षाओं को रद कर दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट का पलटा फैसला

शीर्ष अदालत ने यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की एक खंडपीठ के फैसले खिलाफ दायर 12 याचिकाओं पर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें भर्ती प्रक्रिया को रद करने के फैसले को गलत ठहराया गया था।

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