नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि केरल भवन कर अधिनियम, 1975 के तहत शैक्षणिक संस्थानों से संबंद्ध ननों के आवासीय परिसर और छात्रों के हॉस्टल संपत्ति कर में छूट पाने के हकदार हैं। जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि धार्मिक, धर्मार्थ या शैक्षिक उद्देश्यों को छूट के लिए अर्हता के रूप में विधायिका द्वारा चिन्हित किया गया है, क्योंकि ये व्यवसाय या वाणिज्यिक गतिविधि से संबंधित नहीं हैं। जस्टिस बीआर गवई भी पीठ में शामिल थे। 

पीठ ने कहा कि नन किसी कॉन्वेंट के पास की इमारत में इसलिए रहती हैं ताकि उन्हें वहां धार्मिक निर्देश मिल सकता है। स्कूल या कॉलेज के पास के हॉस्टल में छात्र इसलिए रहते हैं, ताकि उन्हें आसानी से निर्देश मिल सके। यह स्वाभाविक है कि इस तरह की आवासीय सुविधाओं का मकसद लाभ कमाना नहीं, बल्कि धार्मिक या शैक्षिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए आवास देना होता है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केरल सरकार की याचिका खारिज दी। राज्य सरकार ने कहा था कि ननों और छात्रों के निवास वाले स्थानों को छूट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि ये आवासीय परिसर होते हैं और इनका धार्मिक या शैक्षिक उद्देश्य नहीं होता।

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