स्कूलों में रोजाना संविधान की प्रस्तावना का पाठ अनिवार्य करने की याचिका खारिज, SC ने कहा- सिलेबस में पहले से ही शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों की सुबह की असेंबली में संविधान की प्रस्तावना पढ़ाने की राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने असेंबली हॉल में संविधान की प्रस्तावना पढ़ने वाली याचिका की मांग खारिज की (फोटो-पीटीआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में संविधान की प्रस्तावना पढ़ाने की PIL खारिज की।
न्यायालय ने कहा, प्रस्तावना छठी कक्षा से ही पाठ्यक्रम में शामिल है।
याचिकाकर्ता ने संवैधानिक जागरूकता हेतु राष्ट्रीय नीति की मांग की थी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल कर एक ऐसी राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई थी जिसके तहत स्कूलों में सुबह की असेंबली के दौरान छात्रों को संविधान की प्रस्तावना पढ़ाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को इस PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि प्रस्तावना पहले से ही स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा है और इसे छठी कक्षा से ही छात्रों को पढ़ाया जाता है।
संविधान की प्रस्तावना को राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग खारिज
दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर धीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका दायर की थी। इस याचिका में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और CBSE के स्कूली बच्चों में संवैधानिक जागरूकता को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि स्कूल असेंबली के दौरान राष्ट्रगान की तरह ही प्रस्तावना का सामूहिक रूप से रोजाना पाठ करने से बच्चे कम उम्र से ही न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों से परिचित हो सकेंगे।
याचिकाकर्ता ने राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में की गई पहलों का भी हवाला दिया, जहां स्कूलों को सुबह की असेंबली में प्रस्तावना का पाठ शामिल करने का निर्देश दिया गया था।
याचिका में तर्क दिया गया कि ऐसी प्रथाएं संवैधानिक शिक्षा के लिए एक समान राष्ट्रीय दृष्टिकोण का मॉडल बन सकती हैं।
याचिका में मई 2025 के CBSE सर्कुलर का भी जिक्र किया गया, जिसमें स्कूलों से असेंबली में रोजाना सकारात्मक बातें शामिल करने का आग्रह किया गया था। इसमें कहा गया कि प्रस्तावना का नियमित पाठ छात्रों में संवैधानिक मूल्यों और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक सार्थक तरीका होगा।
(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)
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