NHAI के पास हाईवे पर खड़ी गाड़ियों के किए क्यों नहीं है निगरानी सिस्टम? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सवाल किया कि संसाधनों के बावजूद उसके पास हाईवे पर खड़े वाहनों की तुरंत निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक तंत्र क्यों नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र पर सवाल किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सवाल किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पास सभी संसाधन है तो उसके पास हाईवे पर रुके हुए या खड़े किए गए वाहनों को तुरंत ट्रैक करने के लिए इलेक्ट्रानिक निगरानी तंत्र क्यों नहीं हो सकता।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस अगस्टीन जार्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान के फालोदी क्षेत्र में नवंबर, 2025 में हुई एक सड़क दुर्घटना से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
13 अक्टूबर तक सुनवाई स्थगित
इस मामले में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नादकर्णी ने हाईवे पर वाहनों की पार्किंग के कारण कुछ हालिया सड़क दुर्घटनाओं का उल्लेख किया था। मामले में पेश हुए एक अधिवक्ता ने बताया कि एनएचएआइ हाईवे पर गश्त करता है।
पीठ को बताया गया कि इस मामले में कई अंतरिम आवेदन दायर किए गए हैं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी और कहा कि वह हाईवे से अतिक्रमण हटाने से संबंधित आवेदनों पर विचार करेगी।
गैरकानूनी पार्किंग पर सुनवाई
सितंबर में मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर अतिक्रमण और खड़े हुए वाहनों का मुद्दा उठाया था। तब एनएचएआई के वकील ने कहा था कि उन्होंने हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और गश्त के लिए परिपत्र जारी किए हैं। न्यायमित्र ने कहा था कि एक प्रमुख मुद्दा हाईवे पर गैरकानूनी पार्किंग है, जो सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनती है।
पिछले वर्ष नवंबर में शीर्ष अदालत ने फालोदी में दो नवंबर को हुई सड़क दुर्घटना का स्वत: संज्ञान लिया था। 13 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया कि कोई भी भारी या वाणिज्यिक वाहन किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर केवल निर्धारित स्थान पर ही रुक सकता है।
ब्लैक स्पॉट की पहचान जरूरी
पीठ ने किसी भी नए ढाबे, खाने की दुकान या वाणिज्यिक संरचना के निर्माण या संचालन पर भी रोक लगा दी थी जो किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकार क्षेत्र में आती है।
शीर्ष अदालत ने सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई को दुर्घटना के ब्लैक स्पॉट व महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करने और उनकी एक व्यापक सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया था।
पीठ का कहना था, 'देखा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग भारत की कुल सड़कों की लंबाई का लगभग दो प्रतिशत हैं, लेकिन सभी सड़क दुर्घटनाओं में उनका योगदान लगभग 30 प्रतिशत है।
कोई भी सड़क, विशेषकर एक्सप्रेस-वे प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की कमी के कारण खतरे का गलियारा नहीं बनना चाहिए।'
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