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डीजीपी की नियुक्ति पर राज्यों के नियमों का ब्योरा दे केंद्र, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

Published: Tue, 03 Nov 2026 10:57 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार प्रस्तुत करने को कहा है।

डीजीपी की नियुक्ति पर राज्यों के नियमों का ब्योरा दे केंद्र।

डीजीपी की नियुक्ति पर राज्यों के नियमों का ब्योरा दे केंद्र।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी नियुक्ति नियमों पर केंद्र से जानकारी मांगी।

  2. झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी सवाल।

  3. केंद्र को 16 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डीजीपी की नियुक्तियों की जांच का दायरा बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से हर राज्य में पुलिस प्रमुखों के चयन और नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार देने को कहा। पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्य बागची और वी.मोहना की पीठ ने झारखंड सरकार और राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा से भी केंद्र और अन्य पक्षों की याचिका पर जवाब मांगा। मिश्रा को सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था। याचिका में उनकी नियुक्ति को चुनौती दी गई है।

पीठ की न्याय-मित्र के तौर पर सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन की दलीलों से सहमति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा,"मुझे लगता है कि राजू सही कह रहे हैं कि केंद्र हर राज्य में डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार हमें दे सकता है।"

रामचंद्रन ने केंद्र और राज्यों को यह बताने का निर्देश देने की मांग की कि क्या उन्होंने डीजीपी की नियुक्तियों को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया है या नियम तय किए हैं और, सबसे अहम, क्या इन प्रविधानों को लागू किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों ने झारखंड जैसे नियम बनाए हैं, लेकिन इसके बावजूद वे सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह संबंधी निर्देशों का पालन करने का दावा करते हैं। उन्होंने खास तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब का जिक्र किया, जहां इसी तरह के प्रविधान होने की बात कही गई है।

अलग-अलग राज्यों की कानूनी व कार्यकारी व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन जरूरी है, ताकि अदालत इस मुद्दे पर समग्र रूप से विचार कर सके, न कि अलग-अलग राज्यों के नियमों की वैधता पर एक-दूसरे से अलग सुनवाई करे।

पीठ ने संकेत दिया कि राज्यों को इस मामले में अपना जवाब देना होगा। पीठ ने न्याय-मित्र से इस विषय पर एक व्यापक नोट रिकार्ड पर रखने को कहा। रजिस्ट्री को इसे स्वीकार कर पक्षकारों की ओर से पेश वकीलों के बीच इसकी प्रतियां बांटने का निर्देश दिया। अदालत ने झारखंड के मौजूदा डीजीपी को 16 नवंबर, 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर भी दिया।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि झारखंड का मामला पहले सुना जाना चाहिए, क्योंकि राज्य के नियम डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर शीर्ष अदालत के निर्देशों के विपरीत पाए गए हैं। पीठ ने आठ अक्टूबर को झारखंड सरकार के पुलिस प्रमुख की नियुक्ति संबंधी नियमों की वैधता पर सवाल उठाया था।

सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले नियुक्ति पर विवाद

झारखंड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव से बात की है और राज्य इस मुद्दे पर विचार कर अदालत के सामने उचित आवेदन या हलफनामा पेश करेगा। केंद्र ने झारखंड सरकार के ‘झारखंड में पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति संबंधी विनियम, 2025’ को चुनौती दी है।

केंद्र का आरोप है कि झारखंड सरकार ने 29 दिसंबर, 2025 को विनियम में संशोधन किया और 30 दिसंबर को तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त कर दिया—उनकी तय सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले। केंद्र के अनुसार, इस नियुक्ति से सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुकी अधिकारी को दो साल का कार्यकाल मिल गया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के विपरीत है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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