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बिना चुनाव लड़े मिला करोड़ों का चंदा? 'डीलिस्टेड' राजनीतिक दलों का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र- EC को नोटिस

Published: Tue, 20 Oct 2026 09:30 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने डीलिस्टेड राजनीतिक दलों को मिले सैकड़ों करोड़ के चंदे और आयकर छूट मामले में चुनाव आयोग व केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चंदे पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चंदे पर नोटिस जारी किया

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे, आयकर छूट और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

जिसमें सैकड़ों करोड़ चंदा पाने वाले चुनाव आयोग द्वारा सूची से हटाए गए (डीलिस्ट) चार राजनीतिक दलों के खिलाफ चुनाव आयोग और आयकर विभाग की कार्रवाई का ब्योरा मांगने वाली एक अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चंदे पर नोटिस

ये नोटिस न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने गत 15 अक्टूबर को अर्जीकर्ता खेम सिंह भाटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया की दलीलें सुनने के बाद जारी किये।

अर्जी में कहा गया है कि देश में छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दल हैं और 67 राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। इनके अतिरिक्त 2854 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल भी हैं।

कहा गया है कि चुनाव आयोग ने नौ अगस्त 2025 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि 334 दलों को इस आधार पर सूची से हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने लगातार छह वर्षों तक कोई चुनाव नहीं लड़ा था या उनके पंजीकृत पते पर पार्टी कार्यालय नहीं था।

अर्जी में कहा गया है कि सूची से हटाए जाने के बाद ये 808 राजनीतिक दल मान्यता प्राप्त नहीं हैं और चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार आयकर अधिनियम के अंतर्गत मिलने वाली कर-छूट के लाभ के पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद, इनमें से अनेक दल कथित रूप से फर्जी दान प्राप्त कर रहे हैं और कर-छूट का लाभ उठा रहे हैं।

अर्जी में मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए चार राजनीतिक दलों सत्य रक्षक पार्टी, गरीब कल्याण पार्टी, आम जनमत पार्टी और स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के नाम और उन्हें प्राप्त दानराशि का विवरण दिया गया है।

चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा

एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि कुछ राजनीतिक दलों की जांच की गई, जिनकी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं थी, फिर भी उन्हें भारी मात्रा में चंदा प्राप्त हुआ और उन्होंने आयकर छूट का लाभ उठाया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सत्यवादी रक्षक पार्टी को वित्तीय वर्ष 2023-24 में 330 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। पार्टी ने वर्ष 2024 के आम चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार खड़ा किया, जो जमानत राशि भी नहीं बचा सका।

अर्जी में मांग है कि इन चारों दलों द्वारा अगर पिछले पांच वर्षों की अंशदान रिपोर्ट प्रस्तुत की गई हो, तो रिपोर्टों तथा की गई कार्रवाई का विवरण चुनाव आयोग कोर्ट में पेश करे।

केंद्र इन चारों दलों द्वारा पिछले पांच वर्षों में दाखिल की गई आयकर विवरणियां कोर्ट में पेश करे। यह भी बताया जाए कि क्या उन्होंने कर-छूट का दावा किया था और इस में क्या कार्रवाई की गई।

इन दलों को निर्देश दिया जाए कि वे राजनीतिक दलों के रूप में प्राप्त अंशदान पर आयकर अधिनियम की धारा 13ए के तहत कर-छूट के पात्र नहीं होने के कारण उस पर देय आयकर, ब्याज एवं दंड का भुगतान करें।

साथ ही इन चारों पार्टियों को निर्देश दिया जाए कि वे अपने दान दाताओं के नाम, उनके स्थाई खाता संख्या और पते का खुलासा करें तथा ऐसे दानदाताओं द्वारा प्राप्त कर-छूट के लाभ की, यदि कोई हो, वसूली की जाए।

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