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SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा: 'मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराना चुनाव आयोग का अधिकार, प्रक्रिया में कोई खामी नहीं'

Published: Wed, 27 May 2026 11:18 AM (GMT+05:30)Updated: Wed, 27 May 2026 01:53 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया को वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा ...और पढ़ें

एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।

एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत बिहार में मतदाता सूचियों का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) शुरू किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने यह फैसला दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया को केवल इसलिए 'अल्ट्रा वायर्स' (अवैध) करार देकर रद नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रक्रिया से अलग है।

सीजेआई ने क्या कहा?

अदालत ने एसआईआर को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया करार दिया है। अदालत ने आगे कहा, "यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है। 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है।"

सीजेआई ने कहा, जिन मामलों में आयोग इस बात से संतुष्ट नहीं होता कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के लिए निर्धारित वैधानिक शर्तों को पूरा करता है, वहां आयोग का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे व्यक्ति को कानून के अनुसार निर्णय के लिए केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेज दे।

'चुनाव आयोग ने कानून के हिसाब से किया काम'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह से कानून का पालन किया गया। इस प्रक्रिया में कोई भी खामी नहीं है। यह चलता रहेगा। साथ ही चुनाव आयोग की सभी शक्तियां बरकरार रहेंगी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रख लिया था सुरक्षित

इस साल की शुरुआत में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाओं में यह दावा किया गया था कि निर्वाचन आयोग के पास इतने बड़े पैमाने पर SIR करने का अधिकार नहीं है।

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