नई दिल्ली [प्रेट्र]। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ सोशल मीडिया पर बेबुनियाद आक्षेप लगाने वाले वकील पर सुप्रीम कोर्ट जमकर बरसा। प्रधान न्यायाधीश ने उक्त वकील की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग अस्वीकार कर दी थी।

जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने वकील के आचरण पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आरोपों से शीर्ष अदालत की छवि धूमिल होगी। अदालत ने कहा कि उनके फैसलों की किसी भी मंच पर चर्चा से उसे कोई समस्या नहीं है, लेकिन वाट्सएप जैसे सोशल मीडिया मंचों पर ऐसे संदेशों के प्रसार से वे असहाय हो जाते हैं।

सुनवाई के दौरान मौजूद रहे एक वकील ने जस्टिस चंद्रचूड़ के हवाले से बताया, 'प्रतिदिन पहले आधे घंटे के दौरान सीजेआइ वकीलों की तत्काल सुनवाई की मांगों पर फैसला लेते हैं। अगर तत्काल सुनवाई की मांग अस्वीकार कर दी जाती है तो क्या वकील को सोशल मीडिया मंचों पर ऐसे बेबुनियाद आक्षेप लगाने चाहिए।' अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे संदेशों को प्रसारित करने वालों को संयम और जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए।

पीठ ने इस बात पर भी आपत्ति जताई जब उक्त वकील ने हाल में रिटायर हुए एक पूर्व जज की टिप्पणियों का हवाला दिया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'जज के रूप में हमारा एक कार्यकाल होता है। हमारे रिटायरमेंट के बाद कोई अगर हमारे पास आता है और हमारी राय मांगता है और उसके बाद जजों को निशाना बनाने के लिए उसका उपयोग करता है तो न्यायपालिका के लिए यह कतई शुभ नहीं है।'

Posted By: Vikas Jangra