यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
SC: सरकारी बसों का राजनीतिक उपयोग करने पर यूपी कांग्रेस कमेटी को सशर्त राहत, चार सप्ताह में एक करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 1981 से 1989 के बीच उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की बसों का राजनैतिक उद्देश्य से ...और पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 1981 से 1989 के बीच उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की बसों का राजनैतिक उद्देश्य से उपयोग किये जाने के मामले में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सशर्त राहत दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीसीसी को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि अगर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) चार सप्ताह में एक करोड़ रुपये जमा कराती है तो उसके खिलाफ 2.66 करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश पर अंतरिम रोक जारी रहेगी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यूपी कांग्रेस कमेटी की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है। शुक्रवार को जब मामला सुनवाई पर आया तो याचिकाकर्ता यूपी कांग्रेस कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने हाई कोर्ट के पैसे के भुगतान आदेश का विरोध किया।
कांग्रेस ने क्या दी दलील?
खुर्शीद ने कहा कि जबकि हाई कोर्ट ने आदेश में यह माना है कि यूपी पब्लिक मनी (रिकवरी एंड ड्यूज) एक्ट 1972 के तहत रिकवरी नहीं हो सकती इसके बावजूद विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए पैसा देने का आदेश दे दिया है। इन दलीलों पर पीठ ने पूछा कि क्या राजनैतिक दल बिना पैसा दिये रैलियों में सार्वजनिक वाहनों का उपयोग कर सकते हैं।
सलमान खुर्शीद ने कहा निश्चित तौर पर नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इस केस में उनका कहना है कि यह तय होना चाहिए कि किस हद तक सरकार की जिम्मेदारी बनेगी और किस हद तक राजनैतिक दल की। अगर राजनैतिक दल ने कांट्रेक्ट किया है तो उसे उस करार के आधार पर भुगतान करना चाहिए।
खुर्शीद ने कहा कि यह बात ट्रायल में तय हो सकती है। हालांकि, पीठ इससे बहुत सहमत नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि पहले ही इस मामले में काफी देर हो चुकी है। मामले को मध्यस्थता के जरिए तय करने की संभावनाएं देखी जा सकती हैं। वकील ने भी इससे सहमति जताई।
कोर्ट ने याचिका पर जारी किया नोटिस
इसके बाद कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता चार सप्ताह में एक करोड़ रुपये जमा कराते हैं तो दोनों पक्षों के हित प्रभावित हुए बगैर आगे रिकवरी का आदेश रुका रहेगा।
इस मामले में हाई कोर्ट ने कहा था कि यूपीसीसी ने अपनी प्रभावी स्थिति को देखते हुए सार्वजनिक संपत्ति का राजनैजतिक उद्देश्य से इस्तेमाल किया था। हाई कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि 1998 में उत्तर प्रदेश राज्य ने कांग्रेस के खिलाफ रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जिस पर हाई कोर्ट ने नवंबर 1998 में रोक लगा दी थी, इसके बाद मामला 25 साल तक लंबित रहा बिलों का भुगतान नहीं हुआ।
हाई कोर्ट ने कहा कि यद्यपि अधिनियम 1972 के प्रविधानों में राशि की रिकवरी नहीं हो सकती लेकिन 25 साल से पैसे का भुगतान नहीं हुआ है इसलिए यूपीसीसी पांच फीसद ब्याज सहित पूरी राशि 266 लाख का भुगतान यूपीएसआरटीसी को करे। हाई कोर्ट का यह आदेश पिछले वर्ष अक्टूबर का है जिसे यूपीसीसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
