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शादी पूरी तरह टूटने के आधार पर विदेशी अदालत का तलाक वैध नहीं :सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटेन से तलाक लेने वाले डॉक्टर की याचिका खारिज की

Published: Tue, 03 Nov 2026 10:46 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक भारत में वैध नहीं है।

विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।

विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।

HighLights

  1. विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी शादी के आरोपी की याचिका खारिज की।

  3. यह फैसला भारतीय वैवाहिक कानून और सीपीसी धारा 13 के तहत।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक वैध नहीं है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने यह टिप्पणी उस व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें उसने दो विवाह करने और आपराधिक साजिश के मामले को रद करने की मांग की थी।

पीठ ने कहा, 'विदेशी अदालत ने भारत में लागू वैवाहिक कानून का उल्लंघन करते हुए तलाक मंजूर किया। साथ ही, यह ऐसा आधार है जिसे कानून में मान्यता भी नहीं दी गई है। यह न सिर्फ सीपीसी की धारा-13 की कानूनी कसौटी का उल्लंघन करता है, जिस पर हर विदेशी डिक्री को खरा उतरना होता है, बल्कि भारत में लागू होने योग्य विदेशी डिक्री के लिए जरूरी शर्तों पर इस अदालत की टिप्पणियों का भी उल्लंघन करता है।'

मामले पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, 'हम इस दलील को उस रूप में स्वीकार नहीं कर सकते, जिस रूप में इसे पेश किया गया है। आरोपित नंबर-1 यानी पति की शादी भारत में प्रतिवादी नंबर-2 यानी पहली पत्नी से हिंदू रीति-रिवाजों व परंपराओं के अनुसार हुई थी।

दूसरी शादी भारत के बाहर भी हुई हो, तब भी भारतीय दंड संहिता की धारा-494 के तहत लगे आरोपों को कमतर नहीं माना जा सकता। दो विवाह के अपराध की जांच केवल दूसरी शादी की जगह तक सीमित नहीं हो सकती; इसमें मौजूदा वैवाहिक संबंध को भी ध्यान में रखना जरूरी है।'

इस मामले में व्यक्ति की पहली शादी 18 अप्रैल, 2003 को आंध्र प्रदेश के सत्तेनपल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के बाद दोनों हैदराबाद में रहने लगे, जहां पति उस्मानिया मेडिकल कालेज से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहा था। 4 फरवरी, 2005 को वह डॉक्टर के रूप में अपना करियर बनाने ब्रिटेन चला गया और बाद में उसकी पत्नी भी वहां पहुंच गई।

अगस्त, 2007 में पहली पत्नी बच्चे को जन्म देने के लिए सत्तेनपल्ली स्थित अपने मायके लौट आई। व्यक्ति ने दावा किया कि बार-बार कहने के बावजूद वह ब्रिटेन नहीं लौटी। पति ने गुंटूर जिले के नरसरावपेट स्थित अदालत में तलाक व अभिरक्षा संबंधी कार्यवाही शुरू की, जिसे खारिज कर दिया गया।

बाद में उसने हाई कोर्ट में अपील की, लेकिन फिर वापस ले ली। उसे एक फरवरी, 2013 को ब्रिटेन की नागरिकता मिली। इसके बाद उसने इंग्लैंड की कैम्ब्रिज काउंटी कोर्ट में पहली पत्नी से तलाक की कार्यवाही शुरू की और 2014 में उसे शादी पूर्ण रूप से टूटने के आधार पर तलाक मिल गया। बाद में उसने ब्रिटेन के नार्फक में दूसरी शादी कर ली।

करीब दो वर्ष बाद पहली पत्नी ने गुंटूर के सत्तेनपल्ली टाउन थाने में शिकायत दर्ज कराई। शीर्ष अदालत ने व्यक्ति के विरुद्ध मामला रद करने से इन्कार कर दिया, लेकिन उसके माता-पिता और दूसरी पत्नी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही रद कर दी।

सोर्स- न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के अनुसार

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