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मासिक धर्म स्वच्छता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों से मांगी रिपोर्ट

Published: Sun, 18 Oct 2026 10:39 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार के रूप में लागू करने की जानकारी न देने पर नाराजगी जताई है।

मासिक धर्म स्वच्छता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी।

मासिक धर्म स्वच्छता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता पर नाराजगी व्यक्त की।

  2. राज्यों-UTs ने लागू करने की जानकारी नहीं दी।

  3. अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया गया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने केंद्र सरकार को अब तक यह जानकारी नहीं दी है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार का हिस्सा घोषित करने के फैसले को किस तरह लागू किया जा रहा है।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और आर महादेवन की पीठ ने कहा-" अगर फैसले में कही गई हमारी बातें सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहने वाली हैं तो केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस मौलिक अधिकार को कैसे लागू करेंगे?"

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने मासिक धर्म की स्वच्छता और मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 का एक हिस्सा घोषित किया है। यह अनुच्छेद जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है। पीठ ने कहा कि एक सितंबर को उसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे अदालत की ओर से चिह्नित की गईं खामियों पर ध्यान दें और सुनवाई की अगली तारीख तक इस संबंध में रिपोर्ट पेश करें।

शीर्ष अदालत ने 30 जनवरी को दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि भारत सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, लेकिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया। पीठ ने कहा कि यह फैसला उन लड़कियों के हित में है, जो मासिक धर्म की समस्याओं के कारण पढ़ाई छोड़ देती हैं।

न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए और जानकारी मांगे कि अदालत के फैसले को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)