सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल के कामकाज पर जताई चिंता, केंद्र लाएगा नया कानून?
सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के कामकाज पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, खासकर कॉलेजों को हर साल मंजूरी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल के कामकाज और वार्षिक मंजूरी पर चिंता जताई

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के कामकाज पर सोमवार को गंभीर चिंता जताई और ऐसे कालेजों को हर साल मंजूरी देने के तर्क पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा रेगुलेटरी सिस्टम से छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा हो रही है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जायमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने पूछा कि केंद्र के प्रस्तावित सुधारों के बावजूद एक पुराना सिस्टम क्यों चल रहा है। पीठ फार्मेसी कालेजों से जुड़ी पीसीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
जस्टिस बागची ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब संस्थानों के पास जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, तो भी उन्हें हर साल मंजूरी क्यों दी जाती है। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी मशीनें और उपकरण भी बेहतर क्वालिटी के होते हैं।
आप बीफार्मा, एम फार्मा या कालेज द्वारा ऑफर किए जा रहे किसी भी दूसरे डिप्लोमा के लिए ऐसा कर सकते हैं। लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि बीफार्मा कोर्स के लिए एक साल का लाइसेंस होगा और फिर दूसरे साल के लिए फिर से लाइसेंस लेना होगा।'
केंद्र की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माना कि मौजूदा सिस्टम से छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा हो रही है। उन्होंने पीठ से कहा, 'कालेज के नजरिए से, छात्र के लिए स्थिति बिल्कुल अनिश्चित हो जाती है। अनिश्चितता अच्छी बात नहीं है। लेकिन मुझे उनसे बात करने दीजिए और फिर मैं आपको बताता हूं। मैं बात समझ गया हूं।'
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
