नई दिल्‍ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोएडा में नौ नवंबर को सनबर्न फेस्टीवल में डीजे बजाने की मांग पर दाखिल याचिका पर जल्‍द सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि लाउडस्‍पीकर बूढ़े लोगों के कानों के लिए मुफीद नहीं है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते दिनों दिए अपने आदेश में शाम पांच से 10 बजे तक डीजे बजाने पर रोक लगा दी थी। उच्‍च न्‍यायालय के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर नवंबर में सुनवाई कर सकती है।  

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन करना नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने कहा था कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के अंतर्गत डीजे बजाने पर एफआईआर दर्ज की जाए। यदि कोई भी शख्‍स इस कानून का उल्लंघन करता है तो पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अदालत ने शहरी, रिहायशी, व्यवसायिक आदि इलाकों को साइलेंस जोनों को श्रेणीबद्ध करने के साथ ही शिकायती टोल फ्री नंबर जारी करने के भी निर्देश दिए थे। यही नहीं हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि कहीं से डीजे बजाने की शिकायत मिलती है तो ऐसी स्थिति में उस क्षेत्र के थाना प्रभारी की जवाबदेही मानी जाएगी।  

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि ध्वनि प्रदूषण कानून का उल्लंघन करने वालों की शिकायत करने वालों के नाम को गोपनीय रखने के साथ ही पुलिस से शिकायत करने का अधिकार दिया था। यही नहीं अदालत ने अपने आदेश के पैरा तीन में राज्‍य के अधिकारियों को भी डीजे बजाने की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के मद्देनजर यूपी प्रशासन ने भी पुलिस को अवमानना करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उम्‍मीद  है कि इस आदेश से लोगों को आगामी वैवाहिक सीजन में डीजे के कानफाडू शोर से मुक्ति मिलेगी। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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