'संसद के काम में दखल नहीं दे सकते', सुप्रीम कोर्ट का SC/ST सीटों के परिसीमन में दखल से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST के लिए विधानसभा या संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित करने के मानदंडों में दखल देने से इनकार किया है।

SC/ST सीटों के परिसीमन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार (फोटो-पीटीआई)
HighLights
SC/ST आरक्षण मानदंडों में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार।
निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण विधायिका का विशेष अधिकार है।
याचिकाकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन का सहारा लेने की सलाह।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह अनुसूचित जातियों (SC) या अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए विधानसभा या संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित करने के मानदंडों में दखल देकर विधायिका के विशेष अधिकारों को अपने हाथ में नहीं ले सकता।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश के कादीपुर विधानसभा क्षेत्र को SC के लिए आरक्षित करने वाली अधिसूचना को रद करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा, 'हम संसद का तीसरा सदन नहीं बन सकते।'
सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन की दी सलाह
CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि SC या ST के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान करना पूरी तरह से विधायिका का अधिकार है और अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती।
पीठ ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता चुने हुए प्रतिनिधियों से सुधार के कदम उठवाने के लिए विरोध-प्रदर्शन का सहारा ले सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ये बेंच कई विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रही है। इसी से जोड़ते हुए पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'यह विरोध-प्रदर्शन, धरने और नारेबाजी का अच्छा मौसम है।'
बेंच ने आगे कहा, 'आप भी अपनी आवाज उठा सकते हैं और चुने हुए प्रतिनिधियों को बता सकते हैं कि अब समय आ गया है कि SC समुदाय के लिए निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित करने के मानदंडों की समीक्षा की जाए और रोटेशनल रिजर्वेशन (बारी-बारी से आरक्षण) का सिद्धांत अपनाया जाए। संवैधानिक अदालत में आकर आपने गलत नंबर डायल कर दिया है।'
'परिसीमन में बदलाव नहीं कर सकते'
वकील ने पूछा, 'क्या परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(c) संवैधानिक रूप से इस तरह काम कर सकती है कि एक ही निर्वाचन क्षेत्र लगातार कई चुनावों तक SC के लिए आरक्षित रहे, जबकि इसमें समय-समय पर बदलाव (रोटेशन) की कोई व्यवस्था ही न हो?'
पीठ ने कहा, 'परिसीमन एक विधायी प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया को चलाने के लिए बनी गाइडलाइंस में अदालतें कोई बदलाव नहीं कर सकतीं।'
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की बात पर सहमति जताई। हाई कोर्ट ने कहा था कि चूंकि अनुच्छेद 330 और 332 में SC और ST के लिए निर्वाचन क्षेत्र आरक्षित करने का प्रविधान है, इसलिए कोई भी सामान्य उम्मीदवार यह दावा नहीं कर सकता कि SC और ST के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के उसके अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
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