'घर खरीदारों को मिलेगी कन्वेयंस डीड', सुप्रीम कोर्ट का पार्श्वनाथ डेवलपर्स को बड़ा निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स की पूरी हो चुकी परियोजनाओं के घर खरीदारों के पक्ष में कन्वेयंस डीड निष्पादित करने की अनुमति दी है।
-1793896134874_m.webp)
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स की पूरी हो चुकी परियोजनाओं के मौजूदा आवंटियों के पक्ष में हस्तांतरण विलेख (कन्वेयंस डीड) निष्पादित करने की अनुमति दे दी।
शीर्ष अदालत ने बिजली शुल्क और कर्मचारियों के बकाये के भुगतान की व्यवस्था के लिए पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उससे जुड़ी इकाइयों के बैंक खाते फ्रीज करने के 13 जुलाई के अपने आदेश में आंशिक ढील भी दी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची की पीठ ने गुरुवार को दिवाला कार्यवाही का सामना कर रही रियल एस्टेट कंपनी के ऋणदाता वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया कि वे इन जरूरी खर्चों के लिए समाधान पेशेवर (आरपी) को पर्याप्त धन उपलब्ध कराएं। 13 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने घर खरीदारों के अधिकारों के प्रति पार्श्वनाथ डेवलपर्स की "बेशर्म उपेक्षा" पर कड़ी फटकार लगाई थी।
पीठ ने पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और उनके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के अपने घरों का कब्जा पाने के लिए 20 साल तक संघर्ष करने पर गौर करते हुए कंपनी के नेतृत्व के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे। पीठ ने स्पष्ट किया कि हस्तांतरण विलेख की अनुमति का इस्तेमाल संपत्तियों में किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
ये निर्देश ऐसे समय आए हैं जब पीठ इस बड़े सवाल पर विचार कर रही है कि पार्श्वनाथ के हजारों घर खरीदारों के हितों की रक्षा कैसे की जाए। इनमें से कई कंपनी की वित्तीय और दिवाला संबंधी मुश्किलों के बीच 2005-07 से कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
इससे पहले, पीठ ने घर खरीदारों के अधिकारों की उपेक्षा करने और हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (एचआरईआरए) के आदेशों का पालन नहीं करने पर पार्श्वनाथ डेवलपर्स को कड़ी फटकार लगाई थी। यह कार्यवाही कैंसर से उबर चुकीं रीता टिक्कू और उनके पति लोकैश टिक्कू की याचिका पर शुरू हुई थी।
दंपती ने गुरुग्राम के सेक्टर 53 स्थित पार्श्वनाथ एक्सोटिका आवासीय परियोजना में 2006 में आवासीय इकाइयां आवंटित की गई थीं और 2007 की शुरुआत में बिल्डर-खरीदार समझौता हुआ था। इसकी कुल कीमत 1.78 करोड़ रुपये थी। पूरे भुगतान के बावजूद याचिकाकर्ताओं को कब्जा नहीं मिला और निर्माण कार्य भी पूरा होने से काफी दूर था।
घर खरीदारों ने हरियाणा रेरा का रुख किया, जिसने उन्हें मुआवजा देने के आदेश पारित किए। बाद में अन्य घर खरीदारों के भी अदालत पहुंचने पर पीठ ने सुनवाई का दायरा बढ़ा दिया। अदालत के दखल पर टिक्कू दंपती को उनके घर का कब्जा मिला।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।