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भीषण गर्मी का कहर लेकर आ रहा अल-नीनो, मई से दिखने लगेगा असर; WMO का अलर्ट

Published: Sat, 25 Apr 2026 11:27 AM (IST)Updated: Sat, 25 Apr 2026 11:39 AM (IST)

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने मई-जुलाई के बीच अल नीनो की स्थिति विकसित होने की चेतावनी दी है, जिससे भारत सहित दक्षिण एशिया के मौसम पर गंभीर असर पड़ेगा।

मई-जून में एल नीनो का असर बढ़ेगी गर्मी घट सकती है बारिश (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

मई-जून में एल नीनो का असर बढ़ेगी गर्मी घट सकती है बारिश (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि एल नीनो की स्थिति मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकती है, जिससे भारत समेत दक्षिण एशिया में मौसम पर बड़ा असर पड़ेगा। पहले अनुमान था कि यह स्थिति मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में बनेगी, लेकिन अब इसके जल्दी आने की संभावना जताई गई है।

एल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जो हर 2 से 7 साल में आती है और करीब 9 से 12 महीने तक रहती है। इसके कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न बदल जाते हैं और आमतौर पर वैश्विक तापमान बढ़ता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान दे चुका है।

डब्ल्यूएमओ के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अगले महीने एल नीनो की स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं।

हर जगह बढ़ सकती है गर्मी

डब्ल्यूएमओ ने कहा है कि मई-जून-जुलाई के दौरान जमीन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। यानी लगभग हर जगह ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। संस्था का मानना है कि ऐसे मौसम पूर्वानुमान कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी होते हैं, ताकि समय रहते तैयारी की जा सके।

डब्ल्यूएमओ के जलवायु पूर्वानुमान प्रमुख विलफ्रान मौफूमा ओकिया ने कहा कि साल की शुरुआत में तटस्थ स्थिति थी, लेकिन अब सभी मॉडल एल नीनो बनने की पुष्टि कर रहे हैं और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।

हिमालय में बर्फ कम, बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में इस साल बर्फ की मात्रा सामान्य से 27.8% कम रही है, जो पिछले 20 सालों में सबसे कम है। इससे नदियों के पानी पर असर पड़ सकता है और करीब 2 अरब लोगों की जल सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

आमतौर पर एल नीनो के दौरान ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में कम बारिश या सूखे की स्थिति बनती है। वहीं दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों और मध्य एशिया में ज्यादा बारिश देखने को मिलती है।

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