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अगले साल भी सस्ती नहीं होगी चीनी? गन्ना दे रहा धोका या कुछ और है वजह

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:30 PM (IST)

इस वर्ष चीनी सत्र की शुरुआत असमंजस में है, क्योंकि अलनीनो के प्रभाव और गन्ने की बुवाई में कमी से ...और पढ़ें

अलनीनो से गन्ने की बुवाई और उत्पादन पर असर

अलनीनो से गन्ने की बुवाई और उत्पादन पर असर

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इस वर्ष का चीनी सत्र असमंजस के बीच शुरू होने जा रहा है। चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए चीनी मिलों पर समय से पहले पेराई शुरू करने का दबाव है। साथ ही अगले सत्र को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

अक्टूबर के पहले सप्ताह तक देश में शरदकालीन गन्ने का रकबा पिछले वर्ष से करीब 43 हजार हेक्टेयर घटा है। बिहार में 30 हजार, उत्तराखंड में 20 हजार और महाराष्ट्र में 14 हजार हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है। हालांकि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में लगभग स्थिर है।

अलनीनो से गन्ने की बुवाई और उत्पादन पर असर

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे का मानना है कि अलनीनो का असर महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में नई बुवाई पर पड़ सकता है, जिससे अगले वर्ष गन्ने की उपलब्धता सीमित हो सकती है।

मौजूदा सत्र में भी संस्था का अनुमान करीब 290 लाख टन चीनी रहने का है, जो पिछले सत्र के करीब 309 लाख टन से कम है। हालांकि एथनॉल निर्माण में चीनी के कम प्रयोग से घरेलू बाजार में तत्काल उपलब्धता पर दबाव कम हो सकता है।

कई राज्यों में गन्ने का रकबा घटा

ऐसे में मौजूदा सत्र का संकट टल सकता है, लेकिन कम बुवाई और प्रतिकूल मौसम ने अगले वर्ष के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। यदि पानी की कमी से नई फसल प्रभावित हुई तो गन्ने की उपलब्धता घटेगी और चीनी उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि गन्ने की बुवाई अभी जारी है, इसलिए आंकड़े बदल सकते हैं, लेकिन उद्योग को पूरे सीजन में गन्ने के रकबे में करीब दो प्रतिशत कमी की आशंका है। कमजोर मानसून, बारिश के असमान वितरण और पानी की कमी इसका प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

अगले साल भी महंगी होगी चीनी  

गन्ना लंबी अवधि की फसल है, इसलिए बुवाई के समय पैदा हुआ जल संकट अगले पेराई सत्र में उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है। सबसे ज्यादा नजर महाराष्ट्र और कर्नाटक पर है, जहां सूखा पड़ा है।

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए मिलों को सामान्य समय से पहले पेराई की अनुमति दी गई है, ताकि पानी की कमी बढ़ने से पहले खेतों में खड़े गन्ने की कटाई हो सके।

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