विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अकेले केंद्र के दम पर विकसित नहीं होगा भारत, सरकार ने राज्यों से इन्फ्रास्ट्रक्चर-मैन्यूफैक्चरिंग पर खर्च बढ़ाने के लिए कहा

By Rajiv KumarEdited By: Naveen Kumar
Published: Sun, 20 Sep 2026 07:39 PM (IST)

केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि 2047 तक 'विकसित भारत' के ...और पढ़ें

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री व राज्यों के वित्त मंत्रियों के बीच हुई बैठक में यह साफ हो गया कि अकेले केंद्र के दम विकसित भारत का निर्माण नहीं किया जा सकता है। बैठक में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने राज्यों से खुलकर कहा कि भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लिए केंद्र के बजट से काम नहीं चलेगा।

मतलब राज्यों को भी अपने बजट को खासकर गुणवत्ता वाले खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च को बढ़ाना होगा। इस काम लिए राज्यों को अपने राजस्व को भी बढ़ाना होगा। राज्यों के वित्त मंत्रियों से कहा गया कि सवाल इस बात का नहीं है कि उनके पास कितनी वित्तीय व्यवस्था है, सवाल इस बात का है कि कोई राज्य आसानी से कितना अधिक निवेश ला सकता है।

इस काम के लिए राज्यों को इंफ्रास्ट्र्क्चर व मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाने, निजी निवेश के प्रोत्साहन को लेकर माहौल बनाने और हाउसिंग सेक्टर के लिए आसान वित्तीय व्यवस्था पर फोकस करने के लिए कहा गया। ये सभी कारक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हाउसिंग फाइनेंस राज्यों की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा

वित्त मंत्रालय के मुताबिक अभी हाउसिंग फाइनेंस की दर राज्यों के जीडीपी (जीएसडीपी) का 2.5 प्रतिशत है। राज्यों से इसे अगले पांच साल में बढ़ाकर तीन प्रतिशत तक लाने के लिए कहा गया है।

हाउसिंग एक ऐसा सेक्टर है जहां सभी राज्यों को आसानी से निवेशक मिल सकते हैं। हाउसिंग फाइनेंस हाउसहोल्ड निवेश, निर्माण कार्य व शहरीकरण से जुड़ा है। इस सेक्टर में राज्य निवेश की सुविधा देकर विकास के लिए वित्त का दायरा बढ़ा सकते है।

मैन्यूफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए सभी राज्यों से औद्योगिक बिजली की दर, माल ढोने व जमीन की लागत और वित्तीय व्यवस्था की लागत को कम करने के लिए कहा गया।

वित्त मंत्रियों की बैठक में यह बात सामने आई है कि भारत में जमीन और वित्तीय व्यवस्था की लागत मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया जैसे देशों से अधिक है। राज्यों को अपने-अपने यहां मैन्यूफैक्चरिंग की कुल लागत को दुनिया के अन्य देशों से कम करने की कोशिश करनी होगी।

इन सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहन

राज्यों से कहा गया कि वे जमीन, बिजली, सड़क कनेक्टिविटी, कारोबारी प्रक्रिया को बिल्कुल आसान और औद्योगिक रिश्तों को बेहतर बनाने का काम करे। दूसरी तरफ निजी निवेशकों को रिन्युएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डाटा सेंटर, टूरिज्म, कृषि संबंधी वैल्यू चेन व सर्कुलर इकोनामी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करें।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि राज्यों के कर्ज व राजस्व जुटाने की उनकी क्षमता को देखते हुए राज्यों को अपने वित्तीय माडल में भी बदलाव करना होगा।

नीति आयोग की इस साल की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस साल का रिकार्ड यह बताता है कि राजस्व जुटाने के मामले में बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश व पंजाब जैसे राज्यों की स्थिति मजबूत नहीं है। उड़ीसा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य इस काम में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें- 'विकसित भारत के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जरूरी', मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की सलाह

यह भी पढ़ें- 'उत्तर बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण की अपार संभावनाएं, विकसित भारत के विजन पर काम जारी'; सिलीगुड़ी में बोले चिराग पासवान