नई दिल्ली, आइएएनएस। स्टार्टअप्स और उद्योगों को जल्द ही देशभर में विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा जरूरी उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। इनकी मदद से उद्योग जगत शोध एवं विकास के लिए जरूरी प्रयोग एवं परीक्षण कर सकेंगे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इस दिशा में प्रयास के लिए फिस्ट (फंड फॉर इंप्रूवमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर इन यूनिवर्सिटीज एंड हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस) प्रोग्राम में नए सिरे से बदलाव कर रहा है। फिस्ट एडवाइजरी बोर्ड के नए चेयरपर्सन संजय ढांडे ने कहा, 'फिस्ट की सफलता के बाद अब फिस्ट 2.0 की ओर कदम बढ़ाया गया है।

इसमें आत्मनिर्भर भारत अहम लक्ष्य होगा।' मौजूदा दौर में शोध एवं विकास प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियां एवं स्टार्टअप्स को ज्यादातर प्रयोग देश के बाहर करने पड़ते हैं। इसकी वजह यह है कि सीमित जरूरत को देखते हुए कंपनियां इन उपकरणों को खरीदना जरूरी नहीं समझती हैं। वहीं उन्हें विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में उपलब्ध इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच नहीं मिलती है।

फिस्ट प्रोग्राम के तहत स्टार्टअप्स के लिए विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध इन्फ्रा का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के क्षेत्र में व्यापक निवेश हो रहा है।

बता दें कि मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के दो युवा उद्यमियों ने कपड़ा तकनीक के क्षेत्र में ऐसा फॉर्मूला खोज लिया है, जो मच्छर, मक्खियों और चींटियों की समस्या से निजात दिलाता है। उनका दावा है कि इस फॉर्मूले से बनाए गए कपड़े 50 धुलाई तक काम करते हैं यानी इन कीटों को दूर रखने में कारगर रहते हैं। युवा उद्यमी श्रेष्ठा और मयूर मालपानी ने साल 2017 में 'क्लोदिंग इनोवेशन' नाम से कंपनी शुरू की थी। इनकी फैक्ट्री में कपड़ों के विशेष ट्रीटमेंट के लिए जो 'आर्मर टेक्नोलॉजी' उपयोग की जाती है, उसका पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया हुआ है।

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